शामली की बेटी का कमाल: आईपीएस ट्रेनिंग के साथ यूपीएससी में हासिल की नौवीं रैंक, अब बनेंगी आईएएस
शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला कस्बे की रहने वाली आस्था जैन ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा दो हजार पच्चीस में अखिल भारतीय स्तर पर नौवीं रैंक हासिल कर जिले का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है। शुक्रवार छह मार्च दो हजार छब्बीस को घोषित हुए परीक्षा परिणामों में आस्था की इस सफलता ने साबित कर दिया कि अटूट परिश्रम और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। एक साधारण बेकरी चलाने वाले की बेटी का देश के सर्वोच्च प्रशासनिक शिखर तक पहुंचने का यह सफर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
आस्था जैन की यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि वह वर्तमान में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रही हैं। वर्ष दो हजार तेईस की यूपीएससी परीक्षा में एक सौ इकतीसवीं रैंक प्राप्त करने के बाद वह इस समय हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में कठिन प्रशिक्षण ले रही थीं। पुलिस ट्रेनिंग की शारीरिक थकान और व्यस्त दिनचर्या के बावजूद आस्था ने अपने आईएएस बनने के सपने को ओझल नहीं होने दिया। उन्होंने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की सहायता लिए अपनी मेहनत और सधी हुई रणनीति के बल पर दूसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया है।
इस गौरवपूर्ण सफलता के पीछे आस्था के पिता का लंबा संघर्ष और मध्यमवर्गीय परिवार का अटूट विश्वास रहा है। उनके पिता कांधला कस्बे में एक छोटी सी कन्फेक्शनरी की दुकान चलाते हैं। अपनी प्राथमिक शिक्षा के बाद आस्था ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उनकी सफलता का सबसे बड़ा पहलू यह रहा कि उन्होंने पुलिस सेवा में रहते हुए भी अपनी एकाग्रता को बनाए रखा और टॉप टेन सूची में जगह बनाकर अपनी कुशाग्र बुद्धि का लोहा मनवाया।
ये भी पढ़ें शाहजहांपुर: खौफनाक वारदात में पत्नी की मौत, प्रेमी गंभीर; गुस्साए लोगों ने आरोपी पति को पीटापरीक्षा परिणाम की सूचना मिलते ही शामली स्थित उनके पैतृक आवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है और पूरे कस्बे में जश्न का माहौल बना हुआ है। आस्था जैन की यह ऐतिहासिक जीत यह संदेश देती है कि सफलता किसी बड़े शहर या आधुनिक संसाधनों की मोहताज नहीं होती। एक छोटे से कस्बे की साधारण बेकरी से निकलकर शीर्ष प्रशासनिक सेवा तक का यह सफर आने वाली पीढ़ियों को यह विश्वास दिलाता रहेगा कि यदि इरादे मजबूत हों तो सफलता का आकाश छूना असंभव नहीं है।
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