ईरान में फंसा झांसी का परिवार, परिजनों ने सरकार से लगाई सुरक्षित वापसी की गुहार
झांसी। इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर जारी हमलों के बीच झांसी का एक परिवार वहां फंसा हुआ है। पुलिस लाइन के पीछे घरैया लाइन क्षेत्र निवासी सैय्यद नकी असकरी (35) करीब 12 वर्ष पहले धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए ईरान गए थे। बाद में वे अपनी पत्नी मल्लिका और तीन बच्चों को भी अपने साथ ले गए।
युद्ध शुरू होने के बाद से परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के कारण फोन पर बात नहीं हो पा रही है। झांसी में रह रहे उनके चाचा सैय्यद हमदोस्त हुसैन ने बताया कि हमले की खबर मिलते ही उन्होंने कई बार कॉल किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इससे पूरे परिवार में गहरी चिंता व्याप्त है।
परिजनों के अनुसार सैय्यद नकी असकरी तेहरान से लगभग 180 किलोमीटर दूर क़ुम शहर में रह रहे थे। वर्ष 2019 में वे झांसी आए थे। उनकी पत्नी और बच्चे कुछ महीने पहले ही ईरान पहुंचे थे। झांसी में उनकी मां नसीमा बेगम बड़े बेटे के परिवार के साथ रहती हैं, जबकि बड़ा भाई सैय्यद रजा कुवैत में कार्यरत है।
चाचा ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने बताया कि परिवार के लोग दिन-रात उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं। युद्ध की खबरों से परिवार में बेचैनी और चिंता का माहौल बना हुआ है।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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