बागपतः जिलाधिकारी अस्मिता लाल का जिला पंचायत कार्यालय में औचक निरीक्षण, मिली अव्यवस्था और कर्मचारियों की अनुपस्थिति
बागपत। कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई समाप्त होते ही जिलाधिकारी अस्मिता लाल अचानक जिला पंचायत कार्यालय पहुंचीं। बिना पूर्व सूचना हुए इस औचक निरीक्षण से कार्यालय में मौजूद अधिकारी-कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी ने परिसर से लेकर कार्यालय कक्ष, स्टोर रूम, अभिलेखागार और सभागार तक हर स्तर पर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया जहां अव्यवस्था और लापरवाही खुलकर सामने आई।
जगह-जगह कचरा पड़ा मिला
निरीक्षण के दौरान कार्यालय परिसर में गंदगी फैली मिली। जगह-जगह कचरा पड़ा था, कार्यालय कक्षों में साफ-सफाई का अभाव दिखा और स्टोर रूम में कूड़ा-कचरा जमा पाया गया। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी कार्यालय शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जनता को जोड़ने का केंद्र होते हैं, ऐसे में यहां गंदगी और अव्यवस्था सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है।
अभिलेख प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक
अभिलेख प्रबंधन की स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। महत्वपूर्ण फाइलें अस्त-व्यस्त थीं, कई दस्तावेज धूल और नमी से खराब हो रहे थे। पुराने अभिलेख क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल अभिलेखों के व्यवस्थित रख-रखाव और सुरक्षित भंडारण के निर्देश दिए। भवन की स्थिति पर भी जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। कार्यालय की छत जर्जर अवस्था में पाई गई, जिसे कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए उन्होंने तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
नौ कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए
निरीक्षण के दौरान अनुशासनहीनता का मामला भी सामने आया। कार्यालय में नौ कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने के आदेश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकारी सेवा में लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यालय की आंतरिक व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। कई कक्षों में नाम-पट्टिकाएं नहीं लगी थीं, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि किस कक्ष में कौन अधिकारी या कर्मचारी तैनात है। जिलाधिकारी ने इसे जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति बताते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक कक्ष में संबंधित अधिकारी-कर्मचारी का नाम, पद और दायित्व अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए।
सभागार का निजी वाहन पार्किंग स्थल के रूप में उपयोग
सभागार के निरीक्षण के दौरान जैसे ही जिलाधिकारी की नजर भीतर खड़ी अनधिकृत बुलेट मोटरसाइकिल पर पड़ी, प्रशासनिक अनुशासन की वास्तविक तस्वीर सामने आ गई। बैठकों और जनहित से जुड़े निर्णयों के लिए निर्धारित सभागार को निजी वाहन पार्किंग स्थल के रूप में उपयोग किया जाना देखकर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह स्थिति न केवल नियमों की खुली अवहेलना है, बल्कि सरकारी परिसंपत्तियों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैये को भी दर्शाती है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभागार किसी व्यक्ति विशेष की सुविधा या निजी उपयोग के लिए नहीं होता, बल्कि यह वह स्थान है जहां जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा, विकास कार्यों पर मंथन और प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी भवन और संसाधन जनता की संपत्ति हैं और उनके दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिला पंचायत कार्यालय ग्रामीण विकास और जनकल्याण योजनाओं का केंद्र है। यहीं से गांवों की सड़क, स्वच्छता, पंचायत विकास और अन्य योजनाओं से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में अभिलेखों की बदहाली और कर्मचारियों की अनुपस्थिति का सीधा असर आम जनता और विकास कार्यों पर पड़ता है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जनसुनवाई व्यवस्था की भी समीक्षा की। निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, फाइलों का निपटारा समय-सीमा में किया जाए और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय हो। उन्होंने कहा कि सुधार केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।
जिलाधिकारी ने सुधार के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए निर्देश दिए कि 24 घंटे के भीतर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। एक सप्ताह में सभी फाइलें व्यवस्थित कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। तत्काल प्रभाव से उपस्थिति और अनुशासन व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए। निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि निर्धारित अवधि में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
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