बिजनौर: फर्जी फर्म बनाकर कोडीन सिरप का काला कारोबार करने वाले आरोपी की जमानत खारिज; एडीजे का सख्त रुख
शक्ति बालाजी मेडिकल्स के नाम पर चल रहा था नशे का अवैध धंधा; फर्जी जीएसटी और कूटरचित दस्तावेजों का हुआ भंडाफोड़; औषधि विभाग की छापेमारी के बाद जेल में बंद है आरोपी शिवांशु सिंह
बिजनौर। जिले में कोडीन युक्त सिरप के अवैध क्रय-विक्रय के गंभीर मामले में शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत मित्तल की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। न्यायालय ने फर्जी फर्म के जरिए नशीली दवाओं का कारोबार करने वाले मुख्य आरोपी शिवांशु सिंह की जमानत याचिका को अपराध की गंभीरता देखते हुए सिरे से खारिज कर दिया। इस मामले में विशेष लोक अभियोजन अधिकारी रितेश कुमार चौहान ने अदालत के समक्ष मजबूती से पक्ष रखते हुए जमानत का विरोध किया।
फर्जीवाड़े का जाल: जीएसटी और नकली पते का सहारा
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन मंत्रालय के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई से जुड़ा है। औषधि निरीक्षक उमेश कुमार भारती ने 'शक्ति बालाजी मेडिकल्स' नामक एक फर्म पर छापा मारा था, जो पूरी तरह फर्जी पाई गई। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी कूटरचित दस्तावेजों, फर्जी जीएसटी नंबर और नकली पते का इस्तेमाल कर भारी मात्रा में कोडीन युक्त सिरप की थोक खरीदारी कर रहे थे। बिना किसी बिल और रिकॉर्ड के इस माल को नशे के रूप में बाजार में खपाया जा रहा था, जो सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ था।
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ये भी पढ़ें दिल्ली: खाड़ी देशों की ओर जाने वाली 100 से अधिक उड़ानें रद्द, यात्री बोले-नहीं होनी चाहिए जंगकोतवाली शहर में 23 नवंबर 2025 को दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस और औषधि विभाग की विवेचना में एक बड़ा नेटवर्क सामने आया। इस अवैध धंधे में शिवांशु सिंह के साथ अरुण कुमार, रेशब, पुनीत और दिव्या जैसे नाम सामने आए। आरोपी फर्जी दस्तावेजों के सहारे नशीले सिरप का स्टॉक ठिकाने लगा रहे थे। इससे पहले अदालत रेशब और पुनीत की जमानत अर्जियां भी खारिज कर चुकी है, जिससे यह साफ है कि कानून ऐसे नशा तस्करों के प्रति कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
अदालत की टिप्पणी: समाज के लिए घातक है यह कारोबार
न्यायाधीश प्रशांत मित्तल ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान माना कि फर्जी फर्म बनाकर नशीले सिरप का व्यापार करना समाज के लिए अत्यंत घातक है। जिला कारागार में बंद शिवांशु सिंह (निवासी साहित्य विहार) की अर्जी को कोर्ट ने जनहित और साक्ष्यों की गंभीरता के आधार पर निरस्त कर दिया। विशेष लोक अभियोजन अधिकारी रितेश कुमार चौहान ने कहा कि अदालत का यह फैसला नशे के सौदागरों के लिए एक कड़ी चेतावनी है। पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी तेज कर रही है।
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लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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