कानपुर में अखिलेश यादव का तंज भरा बयान, कविता के जरिए साधा राजनीतिक निशाना
कानपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कानपुर प्रवास के दौरान अपने चिर-परिचित तंज भरे अंदाज में सत्तापक्ष पर जोरदार हमला बोला। इस बार उन्होंने केवल भाषणबाजी का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी बात को प्रभावी ढंग से कहने के लिए कविता और शायरी का सहारा लिया। कानपुर की धरती से दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
अखिलेश यादव ने वर्तमान सरकार की नीतियों, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को केंद्र में रखते हुए कविता की पंक्तियां पढ़ीं। उन्होंने अपने शब्दों के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार जमीनी हकीकतों से दूर है और जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल विज्ञापनों में सिमट कर रह गई है। उन्होंने कविता के लहजे में कहा कि जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है और नारों की सच्चाई समझ चुकी है।
कानपुर के औद्योगिक पतन और स्थानीय समस्याओं का जिक्र करते हुए सपा अध्यक्ष ने तंज कसा कि जो शहर कभी उत्तर भारत का मैनचेस्टर कहलाता था, आज वह सरकारी अनदेखी का शिकार है। उन्होंने कहा कि कविता के ये शब्द केवल तुकबंदी नहीं हैं, बल्कि आम आदमी का दर्द हैं जो वे बयां कर रहे हैं। अखिलेश यादव के इस 'काव्यात्मक वार' पर वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने जमकर उत्साहवर्धन किया।
सत्ताधारी दल ने अखिलेश यादव के इस बयान पर पलटवार करने में देरी नहीं की। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि जिनके पास विकास का कोई ठोस रोडमैप नहीं होता, वे ही अक्सर कविताओं और तंज का सहारा लेते हैं। फिलहाल, अखिलेश यादव का यह नया अंदाज सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहा है और समाजवादी पार्टी के समर्थक इसे 'जनता की आवाज' बताकर साझा कर रहे हैं।
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