बेफिक्र होकर मनाए होली, जिद्दी रंगों से नाखूनों को बचाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
नई दिल्ली। होली एक ऐसा त्योहार है, जिसका सनातन धर्म में विशेष महत्व है। 4 मार्च को देशभर में रंग-गुलाल के त्योहार को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस खास दिन लोग एक-दूसरे के साथ खुशिया बांटते हुए प्यार और स्नेह से भरे पारंपरिक पर्व को सेलीब्रेट करेंगे। होली को लेकर देशभर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। रंग-गुलाल से बाजार सज चुके हैं और घरों से अलग-अलग प्रकार की पकवानों की खुशबू आने लगी है। होली एक ऐसा त्योहार है, जिसे लोग दिल खोलकर मनाते हैं। यूं तो यह पर्व अधिकांश लोगों को काफी पसंद होता है, लेकिन जिद्दी रंगों की वजह से आजकल लोग होली खेलने से झिझकते हैं।
अक्सर ऐसा होता है कि होली खेलने के बाद रंग और गुलाल हाथ-पांव के नाखूनों में फंस जाते हैं, जो कई बार धोने के बाद भी हफ्तों तक साफ नहीं होते। अगर आप उन लोगों में से हैं जिनके लिए होली पसंदीदा त्योहारों में से एक है, लेकिन आपको अपने नाखूनों से भी बहुत प्यार है, तो रंग के कारण उनके खराब होने की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। केमिकल वाले जिद्दी रंगों के दागों से नाखून को बचाने के लिए आप होली से पहले कुछ आसान और असरदार टिप्स को अपनाएं।
इसके लिए आप होली खेलने से पहले ही नाखूनों पर गहरा नेल पेंट लगाएं। वहीं, अगर आप नोल पॉलिस नहीं लगा सकते हैं, तो नेल पेंट का ट्रांसपेरेंट कोट का इस्तेमाल करें। इससे आपके नाखूनों पर एक सुरक्षात्मक लेयर बनती है, जिससे रंग या गुलाल सीधे तौर पर आपके नाखूनों पर नहीं चिपकते और कम से कम दाग छोड़ते हैं। अक्सर होली में लंबे नाखून वालों को ज्यादा समस्या होती है। इसलिए वे लोग होली खेलने से पहले ही अपने नाखून हल्का सा ट्रिम या छोटा कर लें। इसी के साथ उसपर नेल पेंट का एक या दो कोट लगा लें। इसके अलावा आप अपनी त्वचा और नाखूनों को होली की जिद्दी रंगों से बचाने के लिए मॉइस्चराइजर और सरसों या नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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