सुधा चंद्रन से लेकर श्रीकांत बोला तक की हर कहानी साहस की मिसाल, ग्रीनएक्स टॉक्स सीरीज पर बोले गौतम अदाणी
नई दिल्ली। देश के दिग्गज कारोबारी गौतम अदाणी ने शुक्रवार को कहा कि सुधा चंद्रन से लेकर श्रीकांत बोला तक की हर कहानी साहस की मिशाल है और हर अडानियन को भावुक करने वाली है। ग्रीनएक्स टॉक्स सीरीज में बताई गई कहानियों को लेकर गौतम अदाणी कहा कि यह केवल कहानियां ही नहीं बल्कि मानीय भावना की विजय है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गौतम अदाणी ने लिखा, "कुछ दिन सिर्फ प्रेरणा ही नहीं देते... बल्कि आपके पूरे दृष्टिकोण को ही बदल देते हैं। आज, ग्रीनएक्स टॉक्स सीरीज को जारी रखते हुए, हमने सिर्फ कहानियां ही नहीं सुनीं, बल्कि मानवीय भावना की विजय देखी।" इस पोस्ट में उन्होंने दिव्या शंकर के नृत्य से लेकर सुधा चंद्रन और श्रीकांत बोला के साथ मीरा शेनोय एवं अलीना आलम का भी जिक्र किया।
उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, "दिव्या शंकर के मनमोहक नृत्य से लेकर सुधा चंद्रन और श्रीकांत बोला की अदम्य यात्राओं तक, हर कहानी साहस की मिसाल थी। मीरा शेनोय और अलीना आलम का समावेशी आजीविका सृजन में समर्पण और हमारी भारतीय नेत्रहीन महिला क्रिकेट टीम की वीर भावना ने हर अदानियन को भावुक कर दिया।" साथ ही, गौतम अदाणी ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की सचिव वी विद्यावती का भी आभार व्यक्ति करते हुए लिखा कि आपकी गरिमामय उपस्थिति से हमें अधिक समावेशी भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया।
पिछले साल सितंबर में, अदाणी समूह ने अदाणी ग्रीन टॉक्स के चौथे संस्करण की मेजबानी की, जिसमें सतत और समावेशी भविष्य को आकार देने वाले परिवर्तनकारी, सामाजिक उद्यमी और इनोवेटर्स एक साथ आए। यह कार्यक्रम, जो भारत में सामाजिक नवाचार के सबसे विशिष्ट मंचों में से एक बन गया है, का उद्घाटन गौतम अदाणी के मुख्य भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने युवा उद्यमियों की भूमिका पर प्रकाश डाला, जो भारत के "दूसरे स्वतंत्रता संग्राम" को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह संघर्ष विदेशी शासन से आजादी के लिए नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी और सामाजिक नवाचार में आजादी के लिए है, जो हर समुदाय का उत्थान करता है, मतभेदों को दूर करता है और लोकतंत्र की नींव को मजबूत करता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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