यूपी की गोशालाओं में 'जर्मनी तड़का': तकनीक से लैस होकर आत्मनिर्भर बनेंगी गोशालाएं, आयोग और जर्मनी की संस्था के बीच हुआ करार
सीएम योगी के विजन को मिलेगी रफ्तार, गोबर और गोमूत्र के व्यावसायिक उपयोग के लिए मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की गोशालाएं अब केवल निराश्रित गोवंश का आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आधुनिक और उत्पादक इकाइयां बनेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का पालन करते हुए प्रदेश की गोशालाओं को जर्मन टेक्नोलॉजी से लैस करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में मंगलवार को उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग और जर्मनी की प्रतिष्ठित संस्था GIZ GmbH के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
आयोग कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता और जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य चयनित गोशालाओं को तकनीकी रूप से स्वावलंबी बनाना है। समझौते के तहत मानव संसाधन कौशल विकास और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि गोशालाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सके।
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी गोशालाएं
गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस समझौते का फोकस वित्तीय सहायता के बजाय ज्ञान और कौशल के आदान-प्रदान पर है। प्रशिक्षण के माध्यम से गोबर, गोमूत्र और अन्य गो-आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही गो-सेवा से जुड़े लोगों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें विशेष ट्रेनिंग मिलेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
योगी सरकार की मंशा गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है। सरकार चाहती है कि गोशालाएं स्वयं का राजस्व उत्पन्न करने वाली संगठित इकाई के रूप में विकसित हों। यह पहल सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों के भी अनुरूप है। गो सेवा आयोग द्वारा जल्द ही उन गोशालाओं का चयन किया जाएगा, जहाँ प्रथम चरण में यह तकनीकी प्रशिक्षण शुरू होना है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

टिप्पणियां