संविदाकर्मियों की हुंकार: एक लाख एनएचएम कर्मियों ने मांगी स्थायी व्यवस्था, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
मेरठ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के करीब एक लाख संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के बैनर तले कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इस पत्र के माध्यम से कर्मचारियों ने वर्तमान की अस्थाई व्यवस्था पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य बजट आधारित स्थायी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने की पुरजोर वकालत की है।
कर्मचारी संघ ने ज्ञापन में अन्य राज्यों की प्रगति का हवाला देते हुए कहा है कि बिहार, केरल और मध्य प्रदेश जैसे प्रदेशों ने अपने स्वास्थ्य मॉडल को सुदृढ़ करने के लिए राज्य बजट में विशेष प्रावधान किए हैं। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी परियोजना आधारित अस्थाई व्यवस्था को समाप्त कर एक ठोस और स्थायी ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने स्वास्थ्य क्षेत्र की बेहतरी के लिए प्रदेश के कुल बजट का कम से कम नौ से दस प्रतिशत हिस्सा इस विभाग के लिए निर्धारित करने का सुझाव भी सरकार को दिया है।
वेतन विसंगतियों और भुगतान में होने वाली देरी को लेकर भी कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा साझा की है। ज्ञापन में मांग की गई है कि एसएनए ई-स्पर्श प्रणाली की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए ताकि हर महीने की तीन तारीख तक सभी कर्मियों को नियमित वेतन मिल सके। इसके साथ ही दस वर्ष से अधिक की सेवा पूरी कर चुके अनुभवी कर्मियों के समायोजन के लिए एक पारदर्शी नीति बनाने और वरिष्ठता का सम्मान करने का आग्रह किया गया है। कर्मचारियों ने सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए ईपीएफ, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं की भी मांग की है।
अपनी सेवाओं का उल्लेख करते हुए कर्मचारियों ने याद दिलाया कि कोरोना काल की विभीषिका से लेकर नियमित टीकाकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा तक, संविदा कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दी हैं। संघ का तर्क है कि यदि स्वास्थ्य कर्मी स्वयं सुरक्षित और भविष्य के प्रति निश्चिंत होंगे, तभी वे जनता को और अधिक प्रभावी सेवाएं दे पाएंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मंशा सरकार से टकराव की नहीं बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की है। अब सबकी नजरें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय लेती है।
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