वाराणसी में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान की बजट प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों ने जमकर हंगामा किया..पुलिस ने 10 किसानों को हिरासत में लिया
वाराणसी । वाराणसी (काशी) में आज केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस समय भारी हंगामा हो गया जब बड़ी संख्या में किसान वहां पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। किसानों के कड़े विरोध और घेराव को देखते हुए मंत्री को बजट पर अपनी बात बीच में ही छोड़कर वहां से निकलना पड़ा। पुलिस ने इस मामले में 10 किसानों को हिरासत में लिया है।
हंगामे की मुख्य वजह: 'काशीद्वार योजना' का विरोध
प्रदर्शनकारी किसान पिंडरा तहसील के 10 गांवों की लगभग 800 एकड़ जमीन को 'काशीद्वार योजना' (Kashi Dwar Scheme) के तहत अधिग्रहित किए जाने का विरोध कर रहे थे।जैसे ही मंत्री ने बोलना शुरू किया, किसान नारेबाजी करते हुए डायस (मंच) पर चढ़ गए और "जमीन नहीं देंगे" के नारे लगाए। उन्होंने हाथों में विरोध प्रदर्शन के प्लेकार्ड भी ले रखे थे। किसानों से खुद को घिरता देख और तीखी कहासुनी के बाद मंत्री कमलेश पासवान प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर अपने कमरे में चले गए।
पुलिस एक्शन और हिरासत
हंगामा बढ़ते देख स्थानीय भाजपा नेताओं ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने स्थिति को संभाला। पुलिस ने नारेबाजी कर रहे करीब 10 प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में लेकर सर्किट हाउस के एक कमरे में बंद कर दिया और बाद में उन्हें वहां से ले जाया गया। हिरासत में लिए गए किसानों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं देंगे और इसके लिए जेल जाने को भी तैयार हैं। सर्किट हाउस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई अन्य अप्रिय घटना न हो।
बजट पर मंत्री का पक्ष (हंगामे से पहले)
हंगामे से कुछ देर पहले मंत्री ने बजट के ग्रामीण विकास से जुड़े कुछ प्रमुख बिंदुओं को साझा किया था। उन्होंने बताया कि मनरेगा के बकाये भुगतान के लिए सरकार ने ₹30,000 करोड़ का प्रावधान किया है। ग्रामीण विकास और 'विकसित भारत 2047' के विजन के लिए ₹70,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।भविष्य की जरूरतों को देखते हुए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के लिए ₹40,000 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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