इफ्तार मामले में शिकायत करने वाले नेता रजत जायसवाल को मिली जान से मारने की धमकी

बनारस। गंगा नदी में इफ्तार पार्टी को लेकर शिकायत करने वाले भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल को अब जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। यह धमकियां इंटरनेशनल कॉल और ईमेल के जरिए दी जा रही हैं। रजत जायसवाल ने इस मामले में वाराणसी के सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब इन धमकियों की गंभीरता से जांच कर रही है और अंतरराष्ट्रीय नंबरों और ईमेल आईडी को ट्रेस करने में जुटी है।
बता दें कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें गंगा के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की जा रही थी। इस दौरान चिकन बिरयानी के अवशेष गंगा में फेंके जाने की शिकायत भी सामने आई थी। इस मामले को लेकर रजत जायसवाल ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने मदनपुरा इलाके के 14 युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रजत जायसवाल ने आईएएनएस से बताया कि उन्हें पहले एक कॉल आया, जिसमें सामने वाला व्यक्ति पाकिस्तानी पंजाबी भाषा में बात कर रहा था। इसके बाद उन्हें ईमेल के जरिए भी धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि 25-30 लोग उनसे बहस करना चाहते हैं और उन्हें एक जगह बुलाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस पूरी जानकारी को उन्होंने डीसीपी काशी जोन 3 गौरव बंसवाल को सौंप दिया है और सिगरा थाने में एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। रजत ने कहा कि प्रशासन उनका पूरा सहयोग कर रहा है और पुलिस लगातार मामले की जांच में लगी है। रजत जायसवाल ने आगे कहा कि उन्हें विशेष समुदाय के द्वारा गाली दी जा रही है और मारने की धमकी दी जा रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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