क्या अब भाजपा सरकार यह तय करेगी कि शंकराचार्य कौन होगा: अविमुक्तेश्वरानंद
,प्रयागराज में वीआईपी घाट का कोई कल्चर नहीं था, योगी सरकार आने के बाद घाट बना,
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में शंकराचार्य के मुद्दे पर दिए गए बयान के बाद शनिवार को काशी से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि जिसे वे प्रमाण-पत्र देंगे, वही शंकराचार्य कहलाएगा, जबकि देश में ऐसी कोई विधिक व्यवस्था नहीं है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री किसी को शंकराचार्य घोषित कर दे। उन्होंने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र के मंदिर यानी विधानसभा में इस प्रकार की टिप्पणी उचित नहीं है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि “क्या अब भारतीय जनता पार्टी या उत्तर प्रदेश सरकार यह तय करेगी कि शंकराचार्य कौन होगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा जिन वासुदेवानंद जी को शंकराचार्य कहा जा रहा है, उन्हें लेकर न्यायालयों में आपत्तियां दर्ज हैं। उनके अनुसार उच्चतम न्यायालय और निचली अदालतों ने संबंधित व्यक्ति को स्वयं को शंकराचार्य के रूप में प्रस्तुत करने से रोका है, इसके बावजूद उन्हें यह पदवी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन्हें परंपरागत मान्यता प्राप्त है, उन्हें शंकराचार्य नहीं माना जा रहा, जो कि धार्मिक क्षेत्र में हस्तक्षेप का संकेत है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर पद के अहंकार का आरोप भी लगाया।
कुंभ और माघ मेले में स्नान पर उठे विवाद के संदर्भ में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अनादि काल से मर्यादा के अनुसार स्नान करते आए हैं और कभी भगदड़ की शिकायत नहीं रही। उन्होंने प्रश्न किया कि “इसी बार इनके समय में भगदड़ की आशंका कैसे उत्पन्न हो गई।”
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के विधानसभा में दिए गए बयान के बाद यह विवाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रयागराज में वीआईपी घाट का कोई कल्चर नहीं था, योगी सरकार आने के बाद घाट बना,
वाराणसी के श्री विद्या मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकारों से कहा कि प्रयागराज में वीआईपी घाट का कोई कल्चर नहीं था, इनकी सरकार आने के बाद यह वीआईपी घाट बना।
उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ कहते कानून सबके लिए बराबर है और स्वयं कानून को नहीं मानते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने ऊपर लगाए हुए मुकदमों को भी हटा लिया है। ऐसा कभी नहीं हुआ है। लोकतंत्र के मंदिर में खड़े होकर जो बात वह कह रहे हैं, उससे सही लोग शर्म कर रहे हैं।
लाठीचार्ज के प्रकरण में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सपा के राज्य में लाठी चार्ज हुआ। उसकी तुलना यह अपने साथ कर रहे हैं। फिर इनके और सपा के कार्यकाल में क्या अंतर है। यह योगी आदित्यनाथ सदन में कह रहे हैं कि मैं उस समय शंकराचार्य नहीं था। तो बता दूं कि मैं शंकराचार्य नहीं था। इनको इतना भी ज्ञान नहीं है। सदन में खड़े होकर तथ्य विरुद्ध बात बोल रहे हैं। सपा की सरकार सत्ता के मद में थी तो उन्होंने लाठी चलाई। आज यह भी सत्ता के मद में चूर है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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