दिसंबर का मौका ना गंवाएं ठंड बढ़ते ही मूली की इन तेज़ बढ़ने वाली किस्मों से खेत भर जाएगा सफेद सोने से और कमाई छूएगी लाखों की ऊंचाई
अगर आप इस रबी सीजन में कम मेहनत में ज्यादा कमाई वाली फसल की तलाश कर रहे हैं तो मूली की खेती आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है. अक्टूबर से दिसंबर तक का समय मूली की बुवाई के लिए सबसे बेहतर माना जाता है और ठंड बढ़ने के साथ इसकी फसल की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी मिलती है. सही किस्में चुनकर किसान कम लागत में भी बहुत बढ़िया उत्पादन हासिल कर सकते हैं और एक एकड़ से लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं.
मूली की खेती कब करें और कितना खर्च आता है
उत्तर भारत में मूली की बुवाई का समय अक्टूबर से दिसंबर तक माना जाता है. खासतौर पर 15 अक्टूबर से 15 दिसंबर के बीच बोई गई फसल सबसे ज्यादा उपज और बेहतर गुणवत्ता देती है. एक एकड़ में मूली की खेती करने पर लगभग बारह से चौदह हजार रुपये तक का खर्च आता है. अच्छी देखभाल के साथ उपज लगभग एक सौ बीस से एक सौ साठ क्विंटल तक मिल जाती है. बाजार भाव अगर आठ से पंद्रह रुपये किलो रहे तो एक एकड़ खेत से लगभग एक लाख से लेकर एक दशमलव आठ लाख रुपये तक की कमाई संभव हो जाती है. खर्च निकालने के बाद भी किसान सत्तर हजार से एक दशमलव छह लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं.
ये भी पढ़ें गमले में टमाटर उगाने का सही तरीका 18 इंच गमला, खास मिट्टी और ऑर्गेनिक खाद से पाएं ढेरों लाल टमाटरमूली की वे टॉप किस्में जो देती हैं ज्यादा और बेहतर उपज
मूली की खेती में किस्म का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है. ठंड के मौसम में कुछ विशेष किस्में तेजी से तैयार होती हैं और ज्यादा उपज देने के लिए जानी जाती हैं. इन किस्मों की मांग बाजार में भी अच्छी रहती है क्योंकि इनकी जड़ें सफेद, मुलायम और स्वाद में संतुलित होती हैं. मूली की सबसे लोकप्रिय किस्मों की बात करें तो पूसा चेतकी किसानों की पहली पसंद मानी जाती है. यह किस्म कम दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी सफेद कोमल जड़ें बाजार में आसानी से बिक जाती हैं. इसके कारण इसकी कीमत भी बेहतर मिलती है.
इसके बाद रैपिड रेड वाइट टिप्ड किस्म भी बहुत तेज बढ़ने वाली मानी जाती है. यह सामान्यत लगभग पच्चीस से तीस दिनों में बाजार में आने लायक हो जाती है. इसकी जल्दी तैयार होने की क्षमता किसानों को सीजन में ज्यादा उत्पादन लेने में मदद करती है.
अगर बात ज्यादा पैदावार की हो तो पूसा हिमानी और पूसा रेशमी दोनों ही किस्में बहुत खास मानी जाती हैं. ये लगभग पचास से पचपन दिनों में तैयार हो जाती हैं. इन किस्मों की जड़ें मजबूत लंबी और समान होती हैं जिसका सीधा लाभ बाजार में मिलता है. पूसा हिमानी की जड़ें लंबी और मोटी होती हैं जबकि पूसा रेशमी अपनी चमकदार बनावट और निरंतर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. इसके कारण किसान इन्हें ज्यादा प्राथमिकता देते हैं.
इसके अलावा पंजाब पसंद किस्म भी ठंड के मौसम के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है. यह जल्दी पकती है और इसकी जड़ें रेशा रहित होती हैं इसलिए बाजार में अच्छी बिक जाती हैं. कुछ निजी बीज कंपनियों की किस्में भी किसानों को बहुत पसंद आती हैं. इनमें सिंजेंटा की आईवेरी महीको की माही 22 और जिंदाल की जिंदाल नंबर 39 शामिल हैं. इन किस्मों में ज्यादा उपज आकर्षक आकार और रोग प्रतिरोधक क्षमता देखी जाती है जो किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करती है.
अगर किसान सही मौसम में सही किस्मों का चुनाव कर लें तो मूली की खेती कम मेहनत में भी शानदार मुनाफा दे सकती है. ठंड के मौसम में मूली की फसल न केवल अच्छी गुणवत्ता देती है बल्कि बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है. इसलिए इस सीजन मूली की उन्नत किस्में अपनाकर आप अपनी आमदनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं.
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

टिप्पणियां