चंद्र ग्रहण: आज अयोध्या में रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन बंद, सूतक काल के दौरान बरतें ये सावधानियां
फाल्गुन पूर्णिमा पर 122 साल बाद चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग; अयोध्या में सुबह 9 बजे से रात 8:30 बजे तक मंदिर रहेंगे बंद, देशभर में सूतक काल प्रभावी
अयोध्या/नई दिल्ली। फाल्गुन पूर्णिमा, 3 मार्च 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण के कारण धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्रों में दर्शन-पूजन के समय में बड़ा बदलाव किया गया है। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान श्री रामलला और हनुमानगढ़ी मंदिर के कपाट आज सुबह 9:00 बजे से लेकर रात 8:30 बजे तक बंद रहेंगे। सायं 6:00 बजे से 6:48 बजे तक चंद्र ग्रहण काल रहेगा।
मंदिरों में दर्शन का समय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने जानकारी दी कि आज सुबह मंगला आरती और श्रृंगार आरती के बाद सुबह 9 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण समाप्ति के पश्चात शाम 7:15 बजे मंदिर में प्रवेश कर गर्भगृह की विधिवत साफ-सफाई और ठाकुर जी का श्रृंगार किया जाएगा। इसके उपरांत रात्रि 8:30 बजे संध्या आरती के साथ पुनः दर्शन-पूजन प्रारंभ हो जाएगा। जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फूंडे ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस दौरान शांति बनाए रखें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
ज्योतिषीय महत्व और प्रभाव
आचार्य पंडित चेतन पाण्डेय के अनुसार, करीब 122 साल बाद होली के आसपास चंद्र ग्रहण का यह विशेष संयोग बना है। यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है। भारत में ग्रहण की अवधि करीब 48 मिनट होगी। शाम 6:00 बजे चंद्रोदय के समय यह ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पूर्व, यानी आज सुबह 9 बजे से ही शुरू हो गया है। सूतक काल में मंदिरों में प्रवेश, देवी-देवताओं का स्पर्श और भोग लगाना वर्जित होता है।
आमजन के लिए सावधानी और दिशा-निर्देश
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार, सूतक काल और ग्रहण के दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
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भोजन और विश्राम: इस दौरान भोजन करने और सोने से बचें।
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गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग व बच्चे: इनका विशेष ख्याल रखें। नुकीले या तेजधार वाले औजारों के इस्तेमाल (काटने, छीलने, सिलने) से बचें।
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मूर्ति स्पर्श: सूतक काल में भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें।
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शुद्धता: ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर घर और मंदिरों की शुद्धता करें।
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नियम: होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
शास्त्रों के अनुसार, एक ही महीने में दो ग्रहण (सूर्य और चंद्र) होने के योग प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक हलचल के संकेत माने जाते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि सभी श्रद्धालु धैर्य बनाए रखें ताकि धार्मिक परंपराएं शांतिपूर्वक संपन्न हो सकें।
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