दूरसंचार सेवाओं के राजस्व संग्रह में उत्तरी क्षेत्र का दबदबा,उत्तर क्षेत्र से ₹7,250 करोड़ का राजस्व प्राप्त
महानियंत्रक वंदना गुप्ता ने की उत्तरी क्षेत्र की समीक्षा, दूरसंचार सेवाओं में सुगमता और दक्षता पर जोर
नई दिल्ली। महानियंत्रक संचार लेखा श्रीमती वंदना गुप्ता ने उत्तरी क्षेत्र की फील्ड इकाइयों की परिचालन दक्षता को सुव्यवस्थित करने के लिए आयोजित दो दिवसीय 'उत्तरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक में जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश (पूर्व व पश्चिम) और दिल्ली के संचार लेखा नियंत्रक कार्यालयों ने भाग लिया।
दिल्ली में 28 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी क्षेत्र देश के दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में रणनीतिक भूमिका निभा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में इस क्षेत्र ने अब तक ₹7,250 करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह किया है। इसमें लाइसेंस शुल्क के रूप में ₹6,500 करोड़ और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में ₹750 करोड़ शामिल हैं। वर्तमान में यह उत्तरी क्षेत्र 850 से अधिक लाइसेंसधारियों का प्रबंधन कर रहा है।
पेंशनभोगियों के लिए 'जीवन की सुगमता' पर लक्ष्य
श्रीमती वंदना गुप्ता ने 1.10 लाख से अधिक पेंशनभोगियों (दूरसंचार विभाग, बीएसएनएल, एमटीएनएल) के कल्याण पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि पेंशन संबंधी सभी लाभ समय पर वितरित हों और शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग का लक्ष्य पेंशनभोगियों के लिए "जीवन की सुगमता" सुनिश्चित करना है।
डिजिटल हाईवे और 'आखिरी गांव' तक कनेक्टिविटी
बैठक का एक मुख्य आकर्षण संजीव सिन्हा द्वारा 'डिजिटल भारत निधि' और संशोधित 'भारत नेट कार्यक्रम' पर दी गई प्रस्तुति रही। चर्चा में सरकार के उस संकल्प को दोहराया गया, जिसके तहत नेशनल डिजिटल हाईवे के माध्यम से देश के आखिरी गांव और आखिरी नागरिक तक तेज और भरोसेमंद फाइबर कनेक्टिविटी पहुंचाई जानी है।
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सीजीसीए श्रीमती वंदना गुप्ता ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को सक्रिय मार्गदर्शन देने की रणनीति पर चर्चा की। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर विभाग का उद्देश्य लाइसेंसधारियों के लिए अनुपालन को सुगम बनाना और परिचालन बाधाओं को दूर करना है, जिससे एक मजबूत व्यावसायिक वातावरण तैयार हो सके। बैठक के समापन पर क्षेत्रीय प्रमुखों को निर्देश दिए गए कि वे आगामी महीनों में पारदर्शिता और दक्षता के साथ निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करें।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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