मेंढर में LoC के पास मिले 9 जिंदा मोर्टार शेल; सेना ने बम निरोधक दस्ते की मदद से किया डिफ्यूज
पुंछ। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास एक गांव में जंग लगे नौ मोर्टार शेल बरामद किए गए। ये शेल मनकोट इलाके में मिले, जो एलओसी के काफी नजदीक है। अधिकारियों के मुताबिक, सेना की टुकड़ी इलाके में एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान जवानों की नजर जमीन पर बिखरे पड़े धातु के संदिग्ध गोले पर पड़ी। करीब जाकर जांच की गई तो पता चला कि ये पुराने और बिना फटे मोर्टार शेल हैं। सुरक्षा के लिहाज से मामला बेहद संवेदनशील था, क्योंकि जंग लगे होने के बावजूद ऐसे गोले कभी भी फट सकते हैं।
बरामदगी के तुरंत बाद पूरे इलाके को एहतियातन घेर लिया गया। आसपास के लोगों को वहां से दूर रहने की हिदायत दी गई। सेना की बम निरोधक टीम (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वॉड) को मौके पर बुलाया गया। टीम ने हालात का जायजा लेने के बाद सभी मोर्टार शेल को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की। मेंढर में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेना और पुलिस की संयुक्त टीम ने नियंत्रित विस्फोट (कंट्रोल्ड ब्लास्ट) के जरिए सभी शेल को सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। एलओसी से सटे इलाकों में पहले भी कई बार इस तरह के बिना फटे गोले मिलते रहे हैं। ये अक्सर पुराने सीमा पार गोलाबारी के अवशेष होते हैं, जो समय के साथ मिट्टी में दब जाते हैं या खुले में पड़े रह जाते हैं। सुरक्षा बल ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हैं और तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कार्रवाई करते हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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