कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को कोर्ट ने सुनाई सजा, जमानत पर रिहा
प्रयागराज,। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में दर्ज मुकदमे में प्रयागराज की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को एक साल की सजा सुनाई । सजा के बाद अदालत ने मंत्री नंदी को जमानत पर रिहा किया। मंत्री नंदी आईपीसी की धारा 147 और 323 में दोषी करार दिए […]
प्रयागराज,। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में दर्ज मुकदमे में प्रयागराज की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को एक साल की सजा सुनाई । सजा के बाद अदालत ने मंत्री नंदी को जमानत पर रिहा किया।
मंत्री नंदी के साथ ही दो अन्य लोग भी दोषी करार दिए गए हैं। मंत्री समेत बाकी लोगों को आईपीसी की धारा 148, 504, 506 और एससी-एसटी एक्ट में बरी कर दिया गया है। मंत्री नंदी पर 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज हुआ था गंभीर धाराओं में मुकदमा। तत्कालीन सपा सांसद रेवती रमण सिंह की जनसभा में हमला करने का आरोप लगा था।
आरोप है कि शहर के मुट्ठीगंज थाने में 3 मई 2014 को सपा सांसद और उम्मीदवार रेवती रमण सिंह की जनसभा चल रही थी। उस वक्त कांग्रेस पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी और उनके समर्थकों ने जनसभा में हंगामा किया और सपा समर्थकों की लाठी-डंडों से पिटाई की। आरोप है कि नंदी के उकसाने पर उनके समर्थक हिंसक हो गए थे। इस हमले में समाजवादी पार्टी के कई समर्थकों को चोटे आई थी।
आरोप है कि नंद गोपाल गुप्ता नंदी और उनके समर्थकों ने समाजवादी पार्टी के दलित कार्यकर्ताओं को जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गालियां भी दी थी। सपा कार्यकर्ता वेंकटरमण शुक्ला ने नंदी और उनके समर्थकों के खिलाफ मुट्ठीगंज थाने में केस दर्ज कराया था। नंदी और उनके समर्थकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था केस। हालांकि नंदी की तरफ से तत्कालीन सपा सांसद रेवती रमण सिंह और उनके समर्थकों के खिलाफ भी क्रास एफ आई आर दर्ज कराई गई थी।
इस घटना के बाद मुट्ठीगंज थाने में जमकर हंगामा हुआ था। तत्कालीन थाना प्रभारी इंद्रजीत चतुर्वेदी ने नंदी और उनकी मेयर पत्नी अभिलाषा गुप्ता समेत तमाम कार्यकर्ताओं के खिलाफ अलग से केस दर्ज किया था। सपा कार्यकर्ता वेंकटरमण शुक्ला द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मुकदमे में अदालत ने फैसला सुनाया है।
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रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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