डिजिलॉजिक सिस्टम्स ने निवेशकों को दिया झटका, कमजोर लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट
नई दिल्ली। डिफेंस और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग सेक्टर के लिए ऑटोमेटेड टेस्ट इक्विपमेंट सिस्टम, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिमुलेटर के डिजाइन, डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई और सपोर्ट का काम करने वाली कंपनी डिजिलॉजिक सिस्टम्स के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में जबरदस्त गिरावट के साथ एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को जोरदार झटका दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 104 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 20 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 83.20 रुपये के स्तर पर हुई। लिस्टिंग के बाद बिकवाली शुरू हो जाने के कारण कंपनी के शेयर थोड़ी देर बाद ही 79.05 रुपये के लोअर सर्किट लेवर पर पहुंच गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी को प्रति शेयर 24.95 रुपये यानी 23.99 प्रतिशत का नुकसान हो चुका है।
डिजिलॉजिक सिस्टम्स का 81 करोड़ रुपये का आईपीओ 20 से 22 जनवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से भी फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.10 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 1.60 गुना सब्सक्राइब हुआ था। वहीं नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में सिर्फ 0.42 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 1.08 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इस आईपीओ के तहत 2 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 77.88 लाख शेयर जारी किए गए हैं। इनमें 66 करोड़ रुपये के 63,08,400 नए शेयर जारी किए गए हैं, जबकि 10,89,600 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिए बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपनी नई फैसिलिटी का सेटअप करने, पुराने कर्ज का बोझ कम करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 2.18 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 2.40 करोड़ रुपये और 2024-25 में उछल कर 8.11 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 के अंत तक कंपनी को 1.61 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 56.12 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में घट कर 51.71 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 72.19 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2025 के अंत तक कंपनी को 18.28 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 10.92 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में घट कर 8.11 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 13.34 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही के अंत यानी 30 सितंबर 2025 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 22.04 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 5.28 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में घट कर 5.44 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए बढ़ कर 13.40 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2025 तक ये 3.34 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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