इलॉन मस्क का मास्टरप्लान: AI डेटा सेंटर्स पृथ्वी पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष और चंद्रमा पर होंगे..क्या हमें मिलेंगे एलियंस? जानें मस्क का विजन
टेक दिग्गज इलॉन मस्क ने एक बार फिर अपनी महत्वाकांक्षी भविष्यवादी योजनाओं से दुनिया को चौंका दिया है। हाल ही में (फरवरी 2026) अपनी AI कंपनी xAI और SpaceX के विलय के बाद एक बैठक में मस्क ने चंद्रमा पर फैक्ट्रियां लगाने और अंतरिक्ष आधारित डेटा सेंटर बनाने का रोडमैप पेश किया है।
1. चांद पर फैक्ट्री और 'मास ड्राइवर' (Mass Driver)
मस्क का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर ऐसी स्वचालित फैक्ट्रियां बनाना है जो AI सैटेलाइट्स का निर्माण करेंगी।
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इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट: मस्क चांद पर एक 'मास ड्राइवर' (एक विशाल विद्युत चुंबकीय गुलेल) बनाना चाहते हैं, जो बिना किसी रॉकेट ईंधन के इन सैटेलाइट्स को सीधे डीप स्पेस (गहरे अंतरिक्ष) में लॉन्च कर सके।
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मकसद: पृथ्वी के संसाधनों पर दबाव कम करना और अंतरिक्ष में ही निर्माण कार्य पूरा करना।
2. सूर्य की ऊर्जा: 1000 गीगावाट (GW) का लक्ष्य
मस्क के अनुसार, पृथ्वी पर AI की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बिजली की कमी एक बड़ी बाधा है।
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अनवरत ऊर्जा: अंतरिक्ष में बादल या रात का संकट नहीं होता। मस्क का विजन है कि अंतरिक्ष आधारित सोलर पैनलों के जरिए 1,000 गीगावाट बिजली पैदा की जाए, जो वर्तमान में अमेरिका की कुल बिजली खपत के बराबर है।
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स्पेस डेटा सेंटर: ये डेटा सेंटर्स अंतरिक्ष में रहकर सीधे सूर्य से ऊर्जा लेंगे और दुनिया भर में AI सर्विस देंगे।
3. "शायद हम एलियंस से मिल सकें"
मस्क ने इस प्रोजेक्ट को "चेतना की लौ" (Light of Consciousness) को ब्रह्मांड में फैलाने का जरिया बताया है।मस्क ने कहा कि जैसे-जैसे हम चांद पर शहर बसाएंगे और डीप-स्पेस में AI सैटेलाइट भेजेंगे, इस बात की पूरी संभावना है कि हम किसी प्राचीन एलियन सभ्यता के अवशेषों या स्वयं एलियंस से मिल सकें। यह देखना 'एपिक' (महाकाव्य जैसा) होगा कि कैसे AI सैटेलाइट्स ब्रह्मांड के उन रहस्यों को खोजते हैं जिन्हें इंसान कभी नहीं देख पाए।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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