मनरेगा से गांधी का नाम हटाया, युवा कांग्रेस ने 'गांधीजी अमर रहे' का होर्डिंग संसद भवन के बाहर लगाया

नयी दिल्ली। युवा कांग्रेस ने मनरेगा का नाम बदलकर सरकार पर इसे कमजोर करने का आरोप लगाया और विरोध में शुक्रवार को यहां संसद भवन के पास रायसीना रोड पर 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अमर रहे' के होर्डिंग लगाए और सरकार की नीति का विरोध किया। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता वरुण पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह होर्डिंग दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना का नाम बदलने और इसे कमजोर करने की मोदी सरकार की नीति के विरोध में यह होर्डिग लगाया गया है।
लाकड़ा ने सुबह जब यहां संसद भवन परिसर में यह होर्डिंग लगाने पहुंचने का प्रयास किया तो पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।
लाकड़ा ने इस मौके पर कहा कि नफरत की राजनीति ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या की थी और आज उसी नफरत और आरएसएस की विचारधारा ने गांधी के नाम की योजना का नाम बदलकर मनरेगा कानून को खत्म करने का काम किया है। भगवान राम जी के नाम पर राजनीति कर भाजपा तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना था कि भाजपा गांधी जी का नाम तो हटा सकती है पर उनकी विरासत को कैसे खत्म करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आज भगवान राम के नाम पर तो राजनीति हो रही है लेकिन जमीन पर बेरोजगारी बढ़ रही है। विश्व का कोई बड़ा नेता भारत आता है तो गांधी जी को नमन करने उनकी समाधि पर जाता है। गांधी जी का सपना था कि आजाद भारत में कोई नागरिक दुखी न हो, सबके पास रोजगार हो लेकिन मनरेगा को खत्म् कर सरकार उनके इस विचार को भी खत्म कर रही है।
दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हिंदुस्तान की मिट्टी में गांधी के विचार और आदर्श घुले हैं, ये सरकार कितनी भी कोशिश कर ले, गांधी का नाम नहीं मिटा पाएगी और न ही मजदूरों के अधिकारों को छीनने की साजिश में सफल हो पाएगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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