इमरान खान अपनी फ्रंटवुमन फराह गोगी के जरिये लेते थे रिश्वत, 1.6 अरब हुए है खातों में जमा !
इस्लामाबाद | पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान पर मंगलवार को उनकी कथित सहयोगी फराह शहजादी उर्फ गोगी के माध्यम से रिश्वत लेने और अन्य भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया, जिसमें तीन साल में उनके खाते में लाखों रुपये जमा किए गए, मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। समा […]
इस्लामाबाद | पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान पर मंगलवार को उनकी कथित सहयोगी फराह शहजादी उर्फ गोगी के माध्यम से रिश्वत लेने और अन्य भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया, जिसमें तीन साल में उनके खाते में लाखों रुपये जमा किए गए, मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
समा टीवी की खबर के मुताबिक, मंगलवार को इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में आंतरिक और कानूनी मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक अताउल्लाह तरार ने यह खुलासा किया। तरार ने दावा किया कि उन्होंने फराह के खातों में हुए लेन-देन के बारे में बैंकों से डेटा हासिल करने में कामयाबी हासिल की।
समा टीवी ने बताया कि 2018 में फराह ने 10-12 बैंक खाते खोले थे। एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार, फराह के खातों में लगभग 969 नकद जमा लेनदेन पिछले तीन वर्षों में दर्ज किए गए थे जब उस्मान बुजदार पाकिस्तान पंजाब के मुख्यमंत्री थे।
ये भी पढ़ें अखिलेश यादव बोले- "धार्मिक गुरुओं का अपमान बर्दाश्त नहीं, अपशब्द बोलना हिंसा और पाप की श्रेणी में"उन्होंने दावा किया कि इन नकद जमाओं का कुल मूल्य करीब 1.6 अरब रुपये है। समा टीवी ने रिपोर्ट किया- जमाकर्ता और प्राप्तकर्ता के नाम के साथ लेन-देन का एक दस्तावेज दिखाते हुए तरार ने दावा किया कि यह इमरान खान के कथित भ्रष्टाचार का सबूत है।
ये भी पढ़ें बेटियों के हाथ होंगे पीले, सरकार देगी 20 हजार: शामली में शादी अनुदान योजना के लिए आवेदन शुरूउन्होंने यह भी दावा किया कि यह खान ने ही फराह को देश से भागने के लिए प्रेरित किया था क्योंकि अगर उसे अधिकारियों द्वारा बुलाया जाता है, तो वह खान के सभी रहस्यों का खुलासा कर देगी। समा टीवी ने बताया कि तरार ने यह भी दावा किया कि खान ने यह सुनिश्चित किया कि फराह को कथित रूप से तैयार माफी योजनाओं से लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि उन्होंने फराह की गिरफ्तारी और पूछताछ का सामना करने के लिए पाकिस्तान वापस भेजने के लिए रेड वारंट हासिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों से भी संपर्क किया। तरार ने दावा किया कि खान व्यक्तिगत पेशी और अन्य तकनीकी पेचीदगियों से छूट मांग रहे थे ताकि उनके मामलों में देरी हो और उनका सामना करने के बजाय उन्हें खारिज किया जा सके।
उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग मामले को तय करने में छह साल नहीं लग सकते, जबकि नवाज शरीफ के मामले और मरियम नवाज के मामले का फैसला महीनों के भीतर किया गया। समा टीवी की खबर के अनुसार, तरार ने मुकदमे में निष्पक्षता की मांग करते हुए कहा, मैं सर्वोच्च न्यायालय से इमरान खान के मामले की रोजाना आधार पर सुनवाई करने की अपील करता हूं।
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रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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