बांग्लादेश की संसद में महिलाओं की 50 रिजर्व सीटों पर मचा बवाल, रमजान में चुनाव की तारीख का 'ऐलान'
ढाका। बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव के बाद अब महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर बवाल शुरू हो गया है। बांग्लादेश की संसद में 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों के नॉमिनेशन को लेकर राजनीतिक दलों में घमासान मचा हुआ है। इस बीच चुनाव आयोग (ईसी) ने बताया कि रमजान के दौरान 13वीं संसद में महिलाओं के लिए आरक्षित 50 सीटों के लिए शेड्यूल जारी हो सकता है। बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार के अनुसार, चुनाव आयोग ने मंगलवार को जानकारी दी कि संसदीय सचिवालय ने 296 संसदीय सदस्यों की वोटर लिस्ट जमा की है, जो 50 आरक्षित सीटों के लिए सांसद चुनेंगे।
ये भी पढ़ें गाजियाबाद : अपार्टमेंट के फ्लैट में लगी भीषण आग, 14 वे फ्लोर पर था फ्लैट, फायर ब्रिगेड ने पाया काबूईसी सचिवालय के उपसचिव मोहम्मद मोनिर हुसैन ने द डेली स्टार को बताया कि महिलाओं के लिए 50 आरक्षित सीटें संसद में उनके प्रतिनिधि के हिसाब से राजनीतिक दलों को दी जाती हैं और सांसद अप्रत्यक्ष चुनाव के जरिए इन्हें भरते हैं। इलेक्शन कमिश्नर अब्दुर रहमानेल मसूद ने द डेली स्टार को बताया, "हम ज्यादा समय नहीं लेंगे। हम ईद से पहले शेड्यूल का ऐलान कर देंगे।" हर पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं? इस बारे में ईसी मसूद ने कहा कि 50 सीटों में से, एक रिजर्व सीट के लिए योग्यता के हिसाब से किसी पार्टी को आम चुनाव में कम से कम छह संसदीय सीटें जीतनी होंगी। द डेली स्टार ने बताया कि महिलाओं की आरक्षित सीटों को कंट्रोल करने वाले कानून के मुताबिक, बीएनपी को 34.66 सीटें मिलेंगी, जिन्हें राउंड अप करके 35 कर दिया जाएगा।
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बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी को 11.33 सीटें मिलेंगी, या कुल 11, और निर्दलीय उम्मीदवार को 1.16 फीसदी। अगर वे गठबंधन में आते हैं, तो यह एक सीट के बराबर होगी। नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) को एक सीट मिलेगी। दूसरी छोटी पार्टियों को तब तक कोई सीट नहीं मिलेगी जब तक वे गठबंधन न करें। कमिश्नर मसूद ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के लिए वोटिंग "असल में, पहले ही शुरू हो चुकी है।" जब आरक्षित महिलाओं की सीटों के चुनाव के समय के बारे में पूछा गया, तो ईसी अब्दुर रहमानेल मसूद ने कहा, "यह चुनाव असल में संसद में मौजूद पार्टियों के लिए है। वे जिसे भी नॉमिनेट करेंगे, हम उसे उम्मीदवार मान सकते हैं। यह प्रक्रिया शपथ लेने के 90 दिनों के अंदर पूरी करनी होगी और हम इसे टाइमफ्रेम के अंदर कर देंगे।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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