यूपी बोर्ड परीक्षा में सामूहिक नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 6 आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में सामूहिक नकल कराने वाले एक बड़े गिरोह का स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ ने मैनपुरी जिले के महाराज सिंह स्मारक इंटर कॉलेज में छापेमारी कर कॉलेज प्रबंधन, शिक्षक और सॉल्वर समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में कॉलेज प्रबंधन से जुड़े आशीष, शिक्षक अरुण कुमार उर्फ टिंकू, शिक्षक अनूप कुमार, सॉल्वर शिव चौहान, अवनीत और अभिजीत सिंह शामिल हैं। एसटीएफ के अनुसार, कॉलेज के प्रधानाचार्य अमरीश और उसके भाई आशीष की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
ये भी पढ़ें अयोध्या में ‘रन फॉर राम 2026’ का भव्य समापन, हजारों धावकों ने दिखाई आस्था और फिटनेस की मिसालयूपीएसटीएफ मीडिया सेल ने बताया कि जांच में यह सामने आया कि कॉलेज प्रशासन द्वारा कक्ष निरीक्षकों, शिक्षकों और सॉल्वरों की मदद से संगठित तरीके से सामूहिक नकल कराई जा रही थी। परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी उत्तर पुस्तिकाएं सॉल्वरों से लिखवाई जा रही थीं। इसके अलावा, कुछ मामलों में शिक्षक और प्रबंधन से जुड़े लोग उत्तर बोल-बोलकर भी कॉपियां हल करा रहे थे। एसटीएफ के मुताबिक, इस अवैध गतिविधि के लिए परीक्षार्थियों से प्रति पेपर लगभग 5 हजार रुपए वसूले जा रहे थे। सॉल्वरों को भी इसके बदले मोटी रकम दी जा रही थी। छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किए हैं, जिनमें दो लिखी हुई उत्तर पुस्तिकाएं, इंटरमीडिएट गणित की पुस्तक, इंटरमीडिएट जीव विज्ञान का प्रश्नपत्र, 6 मोबाइल फोन सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री शामिल है। एसटीएफ ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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