एनसीआरटीसी की हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट परियोजना से एनसीआर के रियल एस्टेट को नई दिशा
मेरठ। एनसीआरटीसी कॉरिडोर पर नमो भारत और मेरठ मेट्रो ट्रेन का संचालन अब पूरी रफ्तार भरेगा। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉरिडोर के बचे खंड पर भी ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया। इसी के साथ ही एनसीआर के दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के बीच कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरूआत हो चुकी है।
व्यापारिक गतिविधियों में तेजी:—
इससे दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के बीच जहां व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी वहीं एनसीआरटीसी कॉरिडोर के आसपास के जमीनों के दाम भी राकेट की गति से आसमान पर पहुंचेंगे। नमो भारत के मेरठ के मोदीपुरम तक संचालन होने से एनसीआर के व्यापारियों के लिए पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिले अब अधिक दूर नहीं होंगे। मोदीपुरम से मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और हरिद्वार पहुंचना आसान होगा। जिससे व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। वहीं मेरठ के पारंपरागत खेल उद्योग के अलावा हैंडलूम और कैंची उद्योग को भी इस कॉरिडोर से बढ़ावा मिलेगा।
प्रॉपर्टी की वैल्यू में उछाल:-
82-किलोमीटर लंबे नमो भारत रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और मेरठ मेट्रो के पूरे सिस्टम के चालू होने से दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर प्रॉपर्टी की वैल्यू में तेज़ी आने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक, स्टेशनों से दो किलोमीटर के दायरे में रियल एस्टेट की कीमतें पिछले दो सालों में ही 30 प्रतिशत से 60% तक बढ़ गई हैं। यह ट्रेंड अब और तेज़ होने की उम्मीद है जब पूरे कॉरिडोर पर ट्रेन का संचालन शुरू हो गया है। इसने पहले कम महत्वपूर्ण इलाकों को भी रहने और व्यापार के लिए ज़्यादा आकर्षक बना दिया है। कुछ प्लॉट्स की ज़मीन की दरें करीब 50 गुना और बढ़ गई है। प्रॉपर्टी की यह उछाल इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित डिमांड का नतीजा है। जैसा कि भारत के दूसरे बड़े अर्बन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में भी देखा गया है।
ग्रोथ का इंजन बनेंगे टीओडी जोन
नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के सिद्धांतों को बढ़ावा देगा। इसका मकसद स्टेशनों के आसपास बहु-केंद्रित विकास को बढ़ावा देना है। जो कि सिंगापुर और टोक्यो जैसे ग्लोबल शहरों के सफल टीओडी मॉडल को टक्कर देगी। जहां ट्रांजिट इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फंड करने और सस्टेनेबल शहरी नियोजन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। स्टेशनों के पास रेजिडेंशियल, कमर्शियल और रिटेल स्पेस को मिलाकर मिश्रित-उपयोग वाली परियोजनाएं विकसित करके, यह पहल एनसीआरटीसी के लिए नॉन-फ़ेयर रेवेन्यू (किराए के अलावा आय) जेनरेट करने और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देगी।
यात्रा का समय घटने से कमर्शियल हब बनने की उम्मीद
दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा के समय को घटाकर लगभग एक घंटे होने से नए रेजिडेंशियल व कमर्शियल हब बनने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी से रहने वालों को आवागमन में ज़्यादा सुगमता मिलेगी। जिससे उन इलाकों में अच्छी क्वालिटी के घरों और कमर्शियल स्पेस की मांग बढ़ेगी। व्यापारियों को उम्मीद है कि बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधि से बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव होंगे और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
एक साल में कई गुना हुई जमीन दरें:-
मेरठ में एक साल में ही जमीन की दरें कई गुना बढ़ गई हैं। दिल्ली रोड पर आरआरटीएस कॉरिडोर के आसपास ही जमीन के दामों में 4 गुना तक उछाल आया है। प्रॉपर्टी की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी से कई प्रोजेक्ट तेजी से उभरे हैं। एनसीआरटीसी का लक्ष्य ज़मीन का मोनेटाइजेशन करना है, लेकिन इन उपक्रमों की सफलता बाज़ार की स्वीकार्यता और कुशल निष्पादन पर निर्भर करती है।
भविष्य का नज़रिया और सेक्टर-संबंधी स्थिति
एनसीआर का रियल एस्टेट सेक्टर, खासकर आरआरटीएस कॉरिडोर में, 2026 तक तेज वृद्धि पकड़ने की तैयारी में है। नमो भारत कॉरिडोर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह मौजूदा शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कितनी सहजता से एकीकृत होता है। प्रॉपर्टी निवेश से परे वास्तविक आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देता है।
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