यूपी में किसानों को दिन में मिलेगी बिजली और डिस्कॉम का घटेगा घाटा
पीएम-कुसुम योजना के तहत 581 पीपीए पर मुहर से ऊर्जा सुधारों को मिली नई रफ़्तार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। कृषि फीडरों के सोलराइजेशन (सौर ऊर्जाकरण) के लिए लागू प्रधानमंत्री कुसुम योजना (कंपोनेंट C2) राज्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रही है, जिसमें कौशांबी और बिजनौर में सफल 3.3 मेगावाट की पायलट परियोजनाएं अब पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन बन चुकी हैं। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के लगभग 3.67 लाख कृषि उपभोक्ताओं को अब दिन के समय सिंचाई के लिए निर्बाध और विश्वसनीय बिजली मिल सकेगी।
बड़े पैमाने पर निवेश और क्षमता विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक 1708.1 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए 581 पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) निष्पादित कर लिए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और पारंपरिक बिजली व डीजल पर उनकी निर्भरता को कम करना है। योगी सरकार की यह पहल न केवल प्रदेश को 'हरित ऊर्जा' की दिशा में ले जा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त कर रही है। इससे अनुमानित 3.67 लाख कृषि उपभोक्ताओं को दिन में नियमित बिजली आपूर्ति मिलने की संभावना है। योगी सरकार की यह पहल न केवल ऊर्जा क्षेत्र को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने और प्रदेश को हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर करने का भी प्रभावी कदम है।
प्रति मेगावाट 1.55 करोड़ रुपये की भारी सब्सिडी
परियोजनाओं को गति देने के लिए सरकार ने वित्तीय ढांचे को बेहद आकर्षक बनाया है। योजना के तहत केंद्र सरकार अधिकतम 1.05 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की सहायता देगी। जबकि राज्य सरकार: 50 लाख रुपये प्रति मेगावाट की अतिरिक्त पूंजीगत सहायता देगी। यानी कुल मिलाकर 1.55 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट तक की वित्तीय मदद दी जा रही है। कौशांबी और बिजनौर में सफल 3.3 मेगावाट की पायलट परियोजनाएं अब पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन चुकी हैं।
डिस्कॉम की वित्तीय सेहत में होगा सुधार
कृषि फीडरों के सौर ऊर्जाकरण से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर सब्सिडी का भारी बोझ कम होने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन से ट्रांसमिशन लॉस कम होगा और दिन के समय महंगी बिजली खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावी मॉनिटरिंग और मजबूत भुगतान तंत्र से यह योजना उत्तर प्रदेश के ऊर्जा ढांचे को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगी।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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