सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले राष्ट्रपति ट्रंप, अनजाने में मेरी शक्तियों को और मजबूत कर दिया
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर हाल ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने कहा कि अनजाने में ही सही, लेकिन अदालत ने उनकी राष्ट्रपति पद की शक्तियों को और मजबूत कर दिया है। उन्होंने टैरिफ, लाइसेंस शुल्क और जन्मसिद्ध नागरिकता जैसे मुद्दों पर कोर्ट की संभावित भूमिका को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गलती से या अनजाने में मुझे संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में अपने हास्यास्पद, मूर्खतापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक विभाजनकारी फैसले से पहले की तुलना में कहीं अधिक शक्तियां और ताकत दे दी हैं।
ये भी पढ़ें वाराणसी के शिवपुर क्षेत्र में मंत्री एके शर्मा ने किया निरीक्षण, सफाईकर्मियों के कार्य को सराहाएक बात तो यह है कि मैं लाइसेंस का उपयोग विदेशी देशों के खिलाफ बिल्कुल भयानक काम करने के लिए कर सकता हूं, खासकर उन देशों के खिलाफ जो कई दशकों से अमेरिका को लूटते रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि फैसले के अनुसार हम उनसे लाइसेंस शुल्क नहीं ले सकते, जबकि हर लाइसेंस के साथ शुल्क लिया जाता है, तो फिर संयुक्त राज्य अमेरिका ऐसा क्यों नहीं कर सकता? लाइसेंस तो शुल्क लेने के लिए ही दिया जाता है। फैसले में इसका स्पष्टीकरण नहीं है, लेकिन मुझे इसका जवाब पता है। अदालत ने अन्य सभी टैरिफ को भी मंजूरी दे दी है, जिनकी संख्या बहुत अधिक है, और अब उन्हें पहले की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली और कड़े तरीके से कानूनी निश्चितता के साथ लागू किया जा सकता है। हमारी अयोग्य सुप्रीम कोर्ट ने गलत लोगों के लिए बहुत अच्छा काम किया है, और इसके लिए उन्हें शर्मिंदा होना चाहिए।
अगली बात जो आप सुनेंगे, वह यह होगी कि वे चीन और अन्य देशों के पक्ष में फैसला देंगे, जो जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) के मुद्दे पर भारी लाभ कमा रहे हैं, यह कहते हुए कि 14वां संशोधन 'गुलामों के बच्चों' की रक्षा के लिए नहीं लिखा गया था, जबकि यह स्पष्ट रूप से उसी उद्देश्य से लिखा गया था, जैसा कि इसके निर्माण, दाखिल और अनुमोदन के सटीक समय से साबित होता है, जो गृहयुद्ध के अंत के साथ पूरी तरह मेल खाता है। इससे बेहतर प्रमाण और क्या हो सकता है?
अगली बात जो आप जानेंगे वह यह होगी कि वे चीन और दूसरों के पक्ष में फैसला सुनाएंगे, जो बर्थराइट सिटिजनशिप पर बहुत पैसा कमा रहे हैं, यह कहकर कि 14वां अमेंडमेंट 'गुलामों के बच्चों' का ध्यान रखने के लिए नहीं लिखा गया था, जो कि इसके बनने, फाइल करने और मंजूरी देने की एकदम सही टाइमिंग से साबित हुआ, जो सिविल वॉर के खत्म होने के साथ ही हुआ। आप इससे बेहतर और क्या कर सकते हैं? लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट गलत नतीजे पर पहुंचने का कोई न कोई तरीका ढूंढ ही लेगा, जिससे चीन और कई दूसरे देश फिर से खुश और अमीर बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसे फैसले लेते रहने दें जो हमारे देश के भविष्य के लिए बहुत बुरे और नुकसानदायक हैं। मुझे एक काम करना है, अमेरिका को फिर से महान बनाना है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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