पाकिस्तानी के केपी में क्वाडकॉप्टर हमला, तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत
पेशावर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अर्धसैनिक बल, फेडरल कॉन्स्टैबुलरी (एफसी) को निशाना बनाकर किए गए एक के बाद एक किए गए दो हमलों में तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। मारे गए सुरक्षाकर्मी घायल साथियों को एंबुलेंस में लेकर अस्पताल जा रहे थे तभी उन पर दूसरा हमला किया गया। स्थानीय मीडिया आउटलेट्स ने इसकी जानकारी दी। प्रमुख दैनिक डॉन ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा के करक जिले में ये हमला हुआ। करक पुलिस प्रवक्ता शौकत खान ने अज्ञात हमलावरों को आतंकवादी बताया। उनके मुताबिक कथित आतंकवादियों ने शुरू में दरगाह शहीदान इलाके में फेडरल कांस्टेबुलरी फोर्ट पर क्वाडकॉप्टर से हमला किया।
करक जिले के पुलिस अधिकारी सऊद खान ने कहा कि जब घायलों को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो गाड़ी पर भी हमला किया गया, जिसमें फेडरल कांस्टेबुलरी के तीन जवान मारे गए। केपी में पिछले एक हफ्ते के दौरान अर्धसैनिक बलों, या सैन्यबलों, को निशाना बनाकर की गई ये तीसरी वारदात है। पिछले हफ्ते ही केपी के बाजौर जिले में एक चेकपोस्ट पर हुए आत्मघाती हमले में 11 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। 18 फरवरी को, वजीर सबडिवीजन के सलगाजी इलाके में एक चेकपोस्ट पर अज्ञात हमलावरों के हमले में फेडरल कांस्टेबुलरी के दो जवान घायल हो गए थे।
ये भी पढ़ें असम कांग्रेस को बड़ा झटका: भूपेन बोरा भाजपा में शामिल, बोले- कांग्रेस देश के सम्मान को पहुँचा रही चोटवहीं, पिछले साल नवंबर में, फोर्स पर एक बड़े हमले में, पेशावर के सद्दार इलाके में फोर्स के हेडक्वार्टर पर एक सुसाइड अटैक में फेडरल कॉन्स्टेबुलरी के तीन जवान शहीद हो गए थे। केपी में पिछले साल कथित आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) की वार्षिक सुरक्षा रिपोर्ट 2025 के अनुसार, केपी में हिंसा में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2024 के मुकाबले मृतकों की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखी गई। 2024 में जहां ये आंकड़ा 1,620 था, वहीं 2025 में बढ़कर 2,331 हो गया। केपी में हमलों की तादाद तेज गति से बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें करीब 44 फीसदी का इजाफा हुआ है। --आईएएनएस केआर/
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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