बहराइच: गरीब बच्चों के लिए आईं हजारों पुस्तकें 4 रुपए प्रति किलो बेची गई! सिस्टम पर सवाल!
बहराइच। उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार करोड़ों का बजट पानी की तरह बहा रही है, लेकिन भ्रष्टाचार के दीमक इसे भीतर ही भीतर खोखला कर रहे हैं। बहराइच से एक ऐसा शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां नौनिहालों के हाथों में होने वाली नई पाठ्यपुस्तकें स्कूल पहुँचने से पहले ही कबाड़ की दुकान पर पहुँच गईं।
भविष्य का 'वजन' और कबाड़ी का 'भाव'
प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के लिए मुफ्त वितरण हेतु आई ट्रक भर किताबें किसी सरकारी गोदाम में नहीं, बल्कि एक कबाड़ की दुकान पर उतारी गईं। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन किताबों से बच्चों का भविष्य संवरना था, उन्हें कथित तौर पर महज ₹4 प्रति किलो के भाव में बेच दिया गया। यानी शिक्षा की गरिमा को रद्दी के भाव तौल दिया गया।
पुलिस की छापेमारी: 13,000 से अधिक किताबें बरामद
मामले की भनक लगते ही और आधिकारिक शिकायत के बाद स्थानीय पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने जब कबाड़ की दुकान पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। मौके से 13,000 से अधिक सरकारी किताबें बरामद की गई हैं, जिन्हें रद्दी में मिलाने की पूरी तैयारी थी।
सिस्टम पर खड़े होते गंभीर सवाल
यह घटना केवल एक चोरी या गबन का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है:
आखिर ट्रक भरकर किताबें कबाड़ की दुकान तक कैसे पहुंचीं?
विभाग के किन जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे यह 'सौदा' हुआ?
क्या उन बच्चों की पढ़ाई की भरपाई हो पाएगी, जो इन किताबों के इंतजार में खाली हाथ स्कूल बैठे हैं?
बड़ी कार्रवाई की तैयारी: पुलिस ने किताबें जब्त कर ली हैं और दोषियों की पहचान की जा रही है। विभागीय स्तर पर भी जांच शुरू हो गई है। यह देखना होगा कि इस 'शिक्षा के सौदे' के पीछे कौन सा बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
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