गुरु गड़बड़ निकले तो रोना स्वाभाविक’ —शंकराचार्य के बयान से छिड़ी नई बहस
वाराणसी। शंकराचार्य के ताजा बयान ने धार्मिक और आध्यात्मिक जगत में एक नई हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में एक संबोधन के दौरान उन्होंने गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि गुरु ही गड़बड़ निकल जाए तो शिष्य का रोना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को वर्तमान समय में धर्म की आड़ में पनप रहे पाखंड और विवादित धर्मगुरुओं पर एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि शिष्य अपने गुरु पर अटूट विश्वास करता है और अपनी आस्था की पूंजी उसके चरणों में समर्पित कर देता है, लेकिन जब वही आधार स्तंभ डगमगा जाता है तो शिष्य के पास पीड़ा और पश्चाताप के अलावा कुछ नहीं बचता।
इस बयान के सामाजिक और धार्मिक निहितार्थ गहरे माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शंकराचार्य ने इशारों-इशारों में उन तमाम तथाकथित बाबाओं और गुरुओं को आईना दिखाया है जो अपने आचरण से सनातन परंपरा को कलंकित कर रहे हैं। उन्होंने भक्तों और अनुयायियों को भी सचेत किया कि गुरु का चयन करते समय विवेक का प्रयोग करना अनिवार्य है। अंधभक्ति के दौर में यह बयान एक चेतावनी की तरह है कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने से पहले पात्रता की परख आवश्यक है।
सोशल मीडिया से लेकर संतों की सभाओं तक अब इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि गुरु-शिष्य परंपरा की मर्यादा को कैसे सुरक्षित रखा जाए। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि आस्था जब आहत होती है तो वह केवल व्यक्ति विशेष को नहीं बल्कि पूरे समाज के भरोसे को तोड़ देती है। उनके इस दो टूक संदेश के बाद अब उन संस्थानों और व्यक्तियों पर दबाव बढ़ गया है जो धर्म के नाम पर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। फिलहाल यह बयान पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे धर्म के शुद्धिकरण की दिशा में एक साहसी कदम बता रहे हैं।
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