जब संजय लीला भंसाली की 'इच्छामृत्यु' पर आधारित फिल्म बनाने पर हुआ था हल्ला, विवादों में रही थी फ्लॉप फिल्म
मुंबई। हरीश राणा की इच्छामृत्यु के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने का आदेश जारी कर दिया है। हरीश राणा 13 साल से अचेत अवस्था में हैं और उन पर डॉक्टरी इलाज का भी कोई प्रभाव नहीं हो रहा है। यह केस जितना मार्मिक है, उतना ही दिल को दहला देने वाला है क्योंकि किसी भी माता-पिता के लिए अपने ही बच्चे की इच्छामृत्यु मांगना दुनिया का सबसे ज्यादा पीड़ा देने वाला काम है। इस केस ने संजय लीला भंसाली की उस फिल्म की याद दिला दी, जिसे लेकर बवाल हुआ था। इच्छामृत्यु जैसे संवेदनशील विषय पर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गुजारिश' विवादों में रही थी। विवाद कई चीजों को लेकर था, जिसमें फिल्म की स्क्रिप्ट चोरी होने से लेकर भारत में इच्छा मृत्यु गैर-कानूनी का होना शामिल था, लेकिन पहले बात करते हैं फिल्म की।
संजय लीला भंसाली की हर फिल्म बॉक्स ऑफिस से लेकर दर्शकों के दिलों पर राज करती है, लेकिन गुजारिश ऐसी फिल्म थी, जिसे देखने के लिए मेकर्स ने फैंस से गुजारिश की थी; हमारा मतलब है कि बड़े बजट और यूनिक विषय पर बनी फिल्म अपना बजट तक नहीं निकाल पाई। फिल्म के रिलीज के बाद आदित्य देवन नाम के एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में फिल्म के खिलाफ याचिका डाली थी। उस वक्त वकील का दावा था कि फिल्म इच्छा मृत्यु जैसे संवेदनशील विषय पर बनी है, जो भारत में गैरकानूनी है। ऐसे में फिल्म में खुले तौर पर ऐसी चीजों को दिखाना इच्छा मृत्यु को बढ़ावा देना है।
फिल्म के विषय को लेकर खूब विरोध हुआ था, लेकिन कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया था। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छा मृत्यु को लेकर दिए फैसले पर खुद भंसाली ने अपनी भड़ास निकाली थी। उन्होंने कहा आ कि जब मैंने इस विषय पर फिल्म बनाई थी तो चारों तरफ हंगामा हो गया था, लेकिन आज सभी लोग चुप हैं। उन्होंने साफ किया था कि फिल्म की कहानी की प्रेरणा उन्होंने किसी अपने से ली थी, जिसने खुद उस दर्द को झेला था। बता दें कि साल 2010 में रिलीज़ हुई 'गुजारिश' में ऋतिक रोशन ने एक अपाहिज शख्स का किरदार निभाया था, जो अपनी इच्छामृत्यु की मांग के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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