देश की बेरोजगारी दर नवंबर में घटकर सात महीने के निचले स्तर 4.7 फीसदी पर आई
नई दिल्ली। बेरोजगारी के मोर्चे पर अच्छी खबर है। भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच बेरोजगारी दर नवंबर में घटकर 4.7 फीसदी पर आ गई है, जो अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले अक्टूबर में यह दर 5.2 फीसदी थी। अप्रैल से नवंबर के दौरान पुरुषों, महिलाओं और कुल व्यक्तियों के बीच बेरोजगारी दर में स्थिर और व्यापक आधार पर गिरावट दर्ज की गई है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इस बारे में मंगलवार को आंकड़े जारे किये हैं। आंकड़ों में बताया गया है कि नवंबर में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण बेरोजगारी दर घटकर 3.9 फीसदी के नए निचले स्तर पर आ गई है। इसी तरह शहरी बेरोजगारी दर घटकर 6.5 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में दर्ज किए गए अपने पिछले सबसे निचले स्तर के बराबर है। अप्रैल में बेरोजगारी की दर 5.1 फीसदी थी। मंत्रालय के मुताबिक कुल मिलाकर यह रुझान श्रम बाजार की स्थितियों के मजबूत होने का संकेत देते हैं, जिन्हें ग्रामीण रोजगार में बढ़ोतरी, महिला भागीदारी में वृद्धि और शहरी श्रम मांग में क्रमिक सुधार का समर्थन मिला है।
मंत्रालय के मुताबिक महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर नवंबर में घटकर 4.8 फीसदी रह गई, जो अक्टूबर में 5.4 फीसदी थी। यह गिरावट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला बेरोजगारी की दर में कमी के कारण आई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 4.0 फीसदी से घटकर 3.4 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 9.7 फीसदी से घटकर 9.3 फीसदी हो गई। इसके अलावा कुल पुरुष बेरोजगारी दर नवंबर में घटकर 4.6 फीसदी रह गई, जो अक्टूबर में 5.1 फीसदी थी। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार नवंबर में ग्रामीण और शहरी पुरुष बेरोजगारी दर क्रमशः 4.1 फीसदी और 5.6 फीसदी रही, जबकि इससे पिछले महीने यह क्रमशः 4.6 फीसदी और 6.1 फीसदी थी।
मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल से नवंबर के दौरान पुरुषों, महिलाओं और कुल व्यक्तियों के बीच बेरोजगारी दर में स्थिर और व्यापक आधार पर गिरावट दर्ज की गई। बयान के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) में नवंबर 2025 में सुधार हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर अप्रैल 2025 के 55.4 फीसदी से बढ़कर नवंबर में 56.3 फीसदी हो गया, जबकि इसी अवधि में कुल डब्ल्यूपीआर 52.8 फीसदी से बढ़कर 53.2 फीसदी हो गया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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