किसान नेता राकेश टिकैत और पूर्व विधायकों पर दो मुकदमों में आरोप तय, दाे जनवरी को होगी अगली सुनवाई
गाजियाबाद,। उत्तर प्रदेश के जनपद गाजियाबाद की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में दो अलग-अलग मुकदमों में मंगलवार को किसान नेता राकेश टिकैत, पूर्व विधायकों समेत अन्य आरोपियों पर आरोप तय किए गए हैं। स्पेशल जज एमपी-एमएलए निशांत मान की अदालत में यह सुनवाई हुई। मामले में आरोपी भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, पूर्व विधायक सुदेश शर्मा, पूर्व मंत्री दलवीर सिंह, पूर्व विधायक वीर पाल राठी, पूर्व विधायक भगवती प्रसाद, चेयरमैन अमरजीत सिंह , पूर्व प्रमुख अजय पाल आदि पेश हुए। स्पेशल जज निशांत मान ने सभी लोगों पर आरोप तय कर साक्ष्य के लिए अगली तारीख 2 जनवरी नियत की है।
साल 2014 में किसानों, रालोद कार्यकर्ताओं व भारतीय किसान यूनियन कार्यकर्ताओं द्वारा स्व. चौधरी अजित सिंह की दिल्ली में कोठी खाली करने के विरोध में मुरादनगर गंग नहर पर किये गये विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था, जिसमें पुलिस ने मुरादनगर थाने पर मुकदमा पंजीकृत किया था, जिसमें 36 व्यक्तियों को नामजद किया गया था। उपरोक्त सभी लोग न्यायलय में हाजिर हो रहे हैं।
मंगलवार को राकेश टिकैत अपने वकील चौधरी अजय वीर सिंह के साथ न्यायलय में उपस्थित हुए। पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर विस्तृत रूप से अपना पक्ष रखा तथा कहा कि पुलिस द्वारा झूठे आरोप नेताओं व कार्यकर्ताओं पर लगाये गए हैं, कोई साक्ष्य पुलिस वहां उपस्थित व्यक्तियों के खिलाफ प्रस्तुत नहीं कर सकी है इसलिए न्यायालय द्वारा उन्हें आरोपों से मुक्त किया जाए। सरकारी वकील बिशमबर सिंह ने कहा कि मुकदमे में परीक्षण के बाद ही तय हो सकेगा कि उपस्थित व्यक्तियों के खिलाफ साक्ष्य है या नहीं, इसलिए इस स्तर पर आरोप मुक्त नहीं किया जा सकता।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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