वादा कॉलेज का, बदला लाठियों से ? गाजियाबाद के लोनी में किसानों ने विधायक नंद किशोर गुर्जर के खिलाफ खोला मोर्चा
किसानों का आरोप- "विधायक के इशारे पर हमें पीटा गया।" शिक्षा और सम्मान की लड़ाई अब सड़कों पर
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में लोनी (Loni) से बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर और स्थानीय किसानों के बीच विवाद अब गहराता जा रहा है। किसानों ने विधायक पर वादाखिलाफी और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
विवाद की मुख्य जड़: कॉलेज का वादा
किसानों का कहना है कि उनकी जमीन और समर्थन के बदले उन्हें क्षेत्र में एक डिग्री कॉलेज बनवाए जाने का भरोसा दिया गया था। किसानों ने आरोप लगाया कि विधायक ने उनसे वादा किया था कि गांव की जमीन पर शिक्षा का केंद्र (कॉलेज) बनेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को लाभ होगा। किसानों का आरोप है कि अब उस वादे से मुकर कर जमीन का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जा रहा है या किसानों की अनदेखी की जा रही है।
विधायक पर गंभीर आरोप: "इशारे पर हुई पिटाई"
धरने पर बैठे किसानों ने विधायक नंद किशोर गुर्जर के खिलाफ केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आपराधिक आरोप भी लगाए हैं।
किसानों का कहना है कि जब उन्होंने अपने हक और वादे को लेकर आवाज उठाई, तो विधायक के इशारे पर उनके साथ मारपीट की गई। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने विधायक के दबाव में आकर किसानों पर लाठियां भांजीं और उनकी सुनवाई नहीं की।
धरने की वर्तमान स्थिति
किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक विधायक माफी नहीं मांगते और कॉलेज का काम शुरू नहीं होता, धरना खत्म नहीं होगा। धरने के दौरान विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है। तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो।
विधायक नंद किशोर गुर्जर का पक्ष
हालांकि विधायक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि कुछ लोग विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं और राजनीतिक रंजिश के तहत उन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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