गाजियाबाद में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम: भड़काऊ पोस्ट और 'जिहादी' व्हाट्सएप ग्रुप चलाने वाले 6 संदिग्ध गिरफ्तार
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम करने का दावा किया है। खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस और इंटेलिजेंस की टीम ने मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में छापेमारी कर छह संदिग्ध युवकों को दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और भड़काऊ सामग्री फैलाने के आरोप में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
पकड़े गए आरोपियों का विवरण
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में युवाओं से लेकर अधेड़ उम्र के व्यक्ति तक शामिल हैं। इनके नाम शावेज (20), जुनैद (23), फरदीन (22), इकराम (36), फजलू (48) और जावेद (45) बताए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़ा गया आरोपी इकराम पेशे से अधिवक्ता (वकील) है। पुलिस अब इनके पिछले रिकॉर्ड और संपर्कों को खंगाल रही है।
सोशल मीडिया निगरानी से खुला राज
पुलिस के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई लोनी में हुए सलीम वास्तविक हमले के बाद सोशल मीडिया पर रखी जा रही पैनी नजर का नतीजा है। जांच के दौरान पता चला कि नाहल गांव के रहने वाले ये आरोपी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से लगातार देश विरोधी और भड़काऊ जानकारी साझा कर रहे थे।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए फैला रहे थे 'जिहाद'
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने एक संगठित व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था, जिसके जरिए वे 'जिहादी' संदेश और भड़काऊ कंटेंट फैला रहे थे। इस ग्रुप में केवल गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई अन्य शहरों के युवक भी जुड़े हुए थे। पुलिस इस ग्रुप के अन्य सदस्यों की भी पहचान कर रही है।
एटीएस और आईबी की एंट्री
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ ने एटीएस (ATS) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को पूरी जानकारी साझा कर दी है। अब केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां संयुक्त रूप से पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके पीछे कौन सा बड़ा हैंडलर या आतंकी संगठन काम कर रहा था। पुलिस का मानना है कि इस मामले में जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
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