रिचा इंडस्ट्रीज घोटाला: ईडी ने अरविंद कुमार को किया गिरफ्तार, 8 दिन की हिरासत
गुरुग्राम,। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) से जुड़े बहुचर्चित बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के पूर्व रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। अरविंद कुमार दिसंबर 2018 से जून 2025 तक रिचा इंडस्ट्रीज के आरपी के तौर पर कार्यरत थे। उन्हें 3 फरवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद अरविंद कुमार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 8 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। इससे पहले इस मामले में रिचा इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और निलंबित प्रबंध निदेशक संदीप गुप्ता को भी पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है।
ईडी ने यह जांच सीबीआई की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट), 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार के आरोपों में मामला दर्ज किया था। आरोप है कि वर्ष 2015 से 2018 के बीच अभियुक्तों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को करीब 236 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया और खुद को अवैध रूप से लाभ पहुंचाया।
ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि अरविंद कुमार ने रेजोल्यूशन प्रोफेशनल के पद पर रहते हुए निजी लाभ के लिए कंपनी के फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया। जांच के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड से बड़ी रकम को परतदार (लेयर्ड) लेन-देन के जरिए उनके करीबी व्यक्तियों, सहयोगियों और कर्मचारियों से जुड़ी संस्थाओं को ट्रांसफर किया गया। इन मध्यस्थों के माध्यम से रकम वापस अरविंद कुमार के निजी बैंक खातों में पहुंचाई गई।
बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, आरपी रहते हुए उनके निजी खातों में 80 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध नकद जमा पाई गई, वहीं संबंधित पक्षों से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर हुई। ये वही पक्ष थे, जिन्हें पहले कंपनी से भुगतान किया गया था। ईडी का कहना है कि अरविंद कुमार मूल बैंक धोखाधड़ी से उत्पन्न ‘अपराध की आय’ के प्रत्यक्ष लाभार्थी थे और उन्होंने इन अवैध पैसों को सीआईआरपी (कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस) से जुड़े वैध लेन-देन के रूप में दिखाने की कोशिश की।
ईडी के मुताबिक, आरपी द्वारा रची गई साजिश के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को लगभग 94 प्रतिशत का भारी नुकसान (हेयरकट) झेलना पड़ा। रिचा इंडस्ट्रीज के परिसमापन के बाद बैंकों को 708 करोड़ रुपए के स्वीकृत दावों के मुकाबले मात्र 40 करोड़ रुपए ही प्राप्त हो सके। इससे पहले इन ही अनियमितताओं से जुड़े मामलों में भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने अरविंद कुमार के आरपी पंजीकरण को दो वर्षों के लिए निलंबित कर दिया था।
ईडी ने कहा है कि दिवाला प्रक्रिया और कानूनी ढांचे का इस तरह का कथित दुरुपयोग न केवल कर्जदाताओं की वसूली और कंपनियों के पुनरुद्धार के उद्देश्यों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि वित्तीय और दिवाला व्यवस्था में जनता के भरोसे को भी कमजोर करता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि धन के पूरे प्रवाह का पता लगाने और सभी संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के लिए आगे की जांच जारी है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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