अरविंद केजरीवाल का बड़ा दावा: 2026 में खत्म हो जाएगा पीएम मोदी का करियर?

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा किया है। केजरीवाल ने भाजपा के अंदरूनी 'रिटायरमेंट फॉर्मूले' का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि क्या 17 सितंबर, 2025 को 75 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पीएम मोदी सक्रिय राजनीति से विदा लेंगे और 2026 तक उनका करियर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा?
"75 साल का नियम क्या मोदी जी पर लागू नहीं होगा?" अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी रैलियों और बयानों में लगातार यह तर्क दिया है कि 2014 में भाजपा ने खुद यह नियम बनाया था कि 75 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नेताओं को सक्रिय पदों से रिटायर कर दिया जाएगा। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन और यशवंत सिन्हा जैसे दिग्गजों का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या यह नियम खुद पीएम मोदी पर लागू नहीं होगा? केजरीवाल का दावा है कि पीएम मोदी अपने उत्तराधिकारी के रूप में अमित शाह का रास्ता साफ कर रहे हैं।
विपक्ष का 'वन नेशन, वन लीडर' पर प्रहार केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर 'तानाशाही' की ओर बढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा 'एक राष्ट्र, एक नेता' के एजेंडे पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने धीरे-धीरे अपनी पार्टी के भीतर के संभावित प्रतिद्वंदियों जैसे शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और मनोहर लाल खट्टर को हाशिए पर धकेल दिया है। उनके मुताबिक, 2026 तक देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
भाजपा का पलटवार: "कोई रिटायरमेंट उम्र तय नहीं" केजरीवाल के इन दावों पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेताओं ने स्पष्ट किया है कि भाजपा के संविधान में प्रधानमंत्री के लिए ऐसी किसी भी 'रिटायरमेंट उम्र' का जिक्र नहीं है। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी न केवल अपना तीसरा कार्यकाल पूरा करेंगे, बल्कि भविष्य में भी देश का नेतृत्व करना जारी रखेंगे। भाजपा ने केजरीवाल के दावों को जनता में भ्रम फैलाने की 'हताशापूर्ण कोशिश' करार दिया है।
2026: राजनीतिक कयासों का केंद्र हालांकि भाजपा इन दावों को सिरे से खारिज कर रही है, लेकिन केजरीवाल ने 2026 की समयसीमा तय कर एक नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों के जरिए विपक्ष भाजपा के भीतर उत्तराधिकार की जंग और गुटबाजी को हवा देने की कोशिश कर रहा है। अब देखना यह होगा कि 2025 में प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिन के बाद देश की राजनीति किस दिशा में मुड़ती है।
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