मनी लॉन्ड्रिंग: भगोड़े संजय भंडारी की संपत्तियों पर फैसला 16 फरवरी को
नई दिल्ली। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भगोड़ा घोषित करार दिए गए हथियार डीलर संजय भंडारी की संपत्तियों को जब्त करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मांग पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज संजय जिंदल ने 16 फरवरी को फैसला सुनाने का आदेश दिया। ईडी ने जवाब दाखिल कर संजय भंडारी की इस दलील का विरोध किया है कि संपत्तियों को जब्त करने की याचिका खारिज की जाए। चार अक्टूबर को संजय भंडारी ने संपत्तियों को जब्त करने की ईडी की याचिका को खारिज करने की मांग की थी। भंडारी ने कहा है कि ईडी को अपनी याचिका में नये तथ्यों को पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
कोर्ट ने 5 जुलाई को भंडारी को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भगोड़ा घोषित कर दिया था। ईडी की ओर से कहा गया था कि संजय भंडारी की भारत, दुबई और ब्रिटेन में बेनामी संपत्तियां हैं। दिल्ली के वसंत विहार, पंचशील शॉपिंग कांप्लेक्स और शाहपुर जाट के अलावा नोएडा और गुरुग्राम में भी बेनामी संपत्तियां हैं। इसके अलावा कई बैंक खाते संजय भंडारी की पत्नी के नाम से हैं। ईडी ने कहा था कि संजय भंडारी के पास सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। कोर्ट के इस फैसले का संजय भंडारी की ओर से दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है, जो अभी लंबित है।
कोर्ट ने दिसंबर 2023 में ईडी की ओर से संजय भंडारी के खिलाफ दाखिल पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। पूरक चार्जशीट में संयुक्त अरब अमीरात के बिजनेसमैन सीसी थम्पी और ब्रिटेन स्थित व्यवसायी सुमित चड्ढा का नाम शामिल किया गया है। उनमें से संजय भंडारी कथित तौर पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के करीबी सहयोगी हैं। ईडी के मुताबिक उसने सुमित चड्ढा और उनकी पत्नी को समन जारी किया था लेकिन दोनों जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए।
ईडी की चार्जशीट में कहा गया है कि कांग्रेस-नीत संप्रग सरकार में भंडारी ने कमीशन लिया और लंदन में संपत्ति खरीदी जिसके लाभार्थी मालिक रॉबर्ट वाड्रा हैं। रॉबर्ट वाड्रा ने ईडी के आरोपों को गलत बताया था। इस मामले में पहले ईडी ने हथियार डीलर संजय भंडारी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क में पंचशील शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में स्थित संपत्ति को कब्जे में लिया था जो कि एसबी हॉस्पिटेलिटी एंड सर्विसेज प्रा.लि. के नाम पर रजिस्टर्ड कराया गया है। ईडी ने 2017 में भंडारी और दूसरे आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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