ब्राह्मणों पर टिप्पणी को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ परिवाद पत्र दायर

मुजफ्फरपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के दिए गए एक बयान को लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर की एक अदालत में उनके खिलाफ मंगलवार को एक परिवाद पत्र दायर किया गया है। मुज्जफरपुर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के रविदास जयंती के मौके पर पंडितों को लेकर […]
मुजफ्फरपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के दिए गए एक बयान को लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर की एक अदालत में उनके खिलाफ मंगलवार को एक परिवाद पत्र दायर किया गया है।
मुज्जफरपुर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के रविदास जयंती के मौके पर पंडितों को लेकर दिए गए एक बयान को लेकर स्थानीय अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने एक परिवाद पत्र दायर किया गया है।
ये भी पढ़ें मुरादाबाद: गैस एजेंसी पर प्रशासन का 'सर्जिकल स्ट्राइक', अनियमितताओं पर भारत गैस का गोदाम सीलपरिवाद पत्र में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि जातियां भगवान ने नहीं बल्कि ब्राह्मणों (पंडितों) ने बनाया है। इस बयान के बाद ब्राह्मणों में आक्रोश है।
ये भी पढ़ें मुज़फ्फरनगर में गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का भारी बवाल, 900 का सिलेंडर 2000 में बेचने का आरोपओझा ने बताया है कि आरएसएस प्रमुख का यह बयान हमने अखबार में पढ़ा। मोहन भागवत का यह बयान ब्राह्मणों को नीचा दिखाने वाला और उनके लिए अपमानजनक है। इस बयान से हमे ठेस पहुंची है। समुदाय विशेष में द्वेष भावना और तोड़ने की बात कही गई थी जो समाज में तोड़ने वाला है।
ब्राह्मणों के प्रति ऐसा बयान देकर मोहन भागवत ने ब्राह्मणों को अपमानित करने का काम किया है। भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओ के तहत न्यायालय ने मामले को स्वीकार करते हुए दिनांक 20 फरवरी को अगली सुनवाई की तिथि मुकर्रर की है।
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