संजय राउत का दावा, शिवसेना के नाम व सिंबल के लिए खर्च किए दो हजार करोड़
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने रविवार को एक चौंकाने वाले दावे में कहा कि मूल ‘शिवसेना’ नाम और ‘तीर-धनुष’ निशान के लिए अब तक 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया गया। अपने सिलसिलेवार ट्वीट में राउत ने कहा, मुझे विश्वसनीय जानकारी मिली है, मुझे विश्वास है, यह केवल प्राथमिक आंकड़ा है और […]
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने रविवार को एक चौंकाने वाले दावे में कहा कि मूल ‘शिवसेना’ नाम और ‘तीर-धनुष’ निशान के लिए अब तक 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया गया।
राउत ने कहा, यह देश के इतिहास में अभूतपूर्व है, जल्द ही कुछ और खुलासे किए जाएंगे। राउत के आरोप को भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) पर उंगली उठाने के रूप में देखा जा रहा है।
शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य प्रवक्ता का सनसनीखेज विवाद ईसीआई द्वारा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले अलग हुए गुट बालासाहेबंची शिवसेना को ‘शिवसेना’ नाम और ‘धनुष-तीर’ चिन्ह आवंटित करने के दो दिन बाद आया है।
ये भी पढ़ें मुंबई में लौटी अखाड़े की शान: कुश्ती के महादंगल ने रचा इतिहास; कांदिवली में जुटा पहलवानों का हुजूमराउत के चौंकाने वाले बयान शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सांसद और अन्य को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग को लेकर बंबई उच्च न्यायालय का रुख करने के एक दिन बाद आए हैं।
राउत को पतरावाला चॉल सौदे से जुड़े एक कथित भ्रष्टाचार और मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में 1 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और 9 नवंबर को रिहा कर दिया गया था।
नाम-चिह्न् खोने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सेना (यूबीटी) ने ईसीआई के फैसले को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना बनाई है।
राउत ने तुकाराम बी. साठे की एक तस्वीर भी साझा की, जो ‘लोकशिर’ अन्नाभाऊ साठे की मराठी पंक्तियों के रूप में प्रसिद्ध हैं, यह न्याय प्रणाली कुछ की रखैल बन गई है, यह संसद हिजड़ों की हवेली बन गई है, किसके लिए क्या मैं अपना दर्द बयां करूंगा, क्योंकि न्याय प्रणाली भ्रष्टाचार से कलंकित हो गई है।
सेना (यूबीटी) के अलावा, इसके महा विकास अघाड़ी सहयोगी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अन्य दलों ने भी ईसीआई के फैसले की निंदा की है, इसे अप्रत्याशित, जल्दबाजी और अन्यायपूर्ण करार दिया है, हालांकि बीएसएस-भारतीय जनता पार्टी के सत्तारूढ़ गठबंधन ने इसकी सराहना की और इसे सच्चाई की जीत बताया।
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रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
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