शुक्रवार विशेष: मां लक्ष्मी की कृपा पाने के अचूक उपाय, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि
आज साल 2026 का एक महत्वपूर्ण शुक्रवार है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और सुख-वैभव के कारक शुक्र ग्रह को समर्पित होता है। यदि आप आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं या जीवन में सुख-शांति की कमी है, तो आज के दिन कुछ विशेष उपाय आपके भाग्य के द्वार खोल सकते हैं।
1. माता लक्ष्मी को प्रिय है सफेद रंग और कमल
शास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी को कमल का फूल और सफेद रंग के भोग अत्यंत प्रिय हैं। आज सुबह स्नान के बाद लक्ष्मी-नारायण मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही मां लक्ष्मी को मिश्री, माखन या दूध से बनी खीर का भोग लगाएं। माता को कमल का फूल अर्पित करना न केवल उन्हें प्रसन्न करता है, बल्कि इससे आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह भी मजबूत होता है, जिससे भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
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शुक्रवार की शाम को घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर गाय के घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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विशेष टिप: दीपक में केसर का एक तिनका या छोटी इलायची डाल दें। मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और महालक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
3. श्रीयंत्र की स्थापना और पूजन
श्रीयंत्र को माता लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना जाता है। यदि आपके घर में श्रीयंत्र नहीं है, तो आज इसकी स्थापना करना श्रेष्ठ है।
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विधि: पहले से मौजूद श्रीयंत्र का दूध और गंगाजल से अभिषेक करें। इसकी नियमित पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है और व्यापार व नौकरी में उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
सफेद वस्तुओं का करें दान
चूंकि शुक्र ग्रह को सफेद रंग प्रिय है, इसलिए आज के दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी, दूध या सफेद वस्त्रों का दान करना भी शुभ फलदायी रहता है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से धर्मनगरी वृंदावन के निवासी पंडित ब्रज बिहारी अत्री मुज़फ्फरनगर के आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र का एक प्रमुख चेहरा हैं। वर्तमान में वे मुज़फ्फरनगर में अर्चक पुरोहित संघ के जिलाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पंडित अत्री जी की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध है; उन्होंने ज्योतिष की गहन शिक्षा हनुमानगढ़ (राजस्थान) के सुप्रसिद्ध पंडित लक्ष्मण दास जी से प्राप्त की है।
पंडित ब्रज बिहारी अत्री जी को कर्मकांड की विद्या विरासत में मिली है। उन्होंने अपने दादा पंडित ख्यालीराम जी और पिता पंडित कृष्ण जीवन अत्री जी के मार्गदर्शन में सनातन परंपराओं को आत्मसात किया। इसके साथ ही, उन्होंने पंडित सीताराम चतुर्वेदी जी से व्याकरण की सूक्ष्म बारीकियों की शिक्षा ग्रहण की। अपनी पारिवारिक विरासत और गुरुओं से प्राप्त ज्ञान के माध्यम से वे मुज़फ्फरनगर में धार्मिक अनुष्ठानों और पुरोहित समाज के हितों के लिए निरंतर समर्पित हैं। धार्मिक परामर्श या अनुष्ठान हेतु उनसे मोबाइल नंबर 9412842153 पर सीधे संपर्क किया जा सकता है।

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