क्या 2026 में सचमुच दुनिया खत्म हो जाएगी ? जानिए कलयुग की आयु और कल्कि अवतार का रहस्य !
वर्तमान डिजिटल युग में जहाँ सूचनाएं बिजली की गति से फैलती हैं, वहीं 'विनाश' और 'प्रलय' जैसी भविष्यवाणियां आम जनमानस में भय पैदा कर रही हैं। इन दिनों विभिन्न पॉडकास्ट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वर्ष 2026 को मानवता के अंत के रूप में पेश किया जा रहा है। लेकिन क्या वास्तव में दुनिया विनाश की ओर बढ़ रही है या यह केवल एक बड़े वैचारिक परिवर्तन की आहट है? रॉयल बुलेटिन की इस विशेष रिपोर्ट में शास्त्रों और विज्ञान के नजरिए से सत्य का विश्लेषण किया गया है। एक सजग समाज के रूप में हमारे लिए यह समझना आवश्यक है कि इन दावों में कितनी सच्चाई है और हमारा धर्म तथा विज्ञान इस बारे में क्या कहता है।
कलयुग की आयु: शास्त्रों की सटीक गणना
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सतयुग: 17,28,000 वर्ष
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त्रेतायुग: 12,96,000 वर्ष
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द्वापरयुग: 8,64,000 वर्ष
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कलयुग: 4,32,000 वर्ष
वर्तमान स्थिति: धार्मिक गणना के अनुसार, कलयुग का प्रारंभ भगवान कृष्ण के पृथ्वी त्यागने के समय (लगभग 3102 ईसा पूर्व) से हुआ था। इस आधार पर कलयुग को शुरू हुए अभी केवल 5,127 वर्ष (लगभग) ही बीते हैं। इसका अर्थ है कि कलयुग का अभी प्रथम चरण ही चल रहा है और इसके अंत में अभी 4,26,873 वर्ष शेष हैं। विद्वानों का तर्क है कि 2026 को 'अंत' मानना शास्त्रीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है, हालांकि यह एक 'संधिकाल' (बदलाव का समय) अवश्य हो सकता है।
भविष्य मालिका और 2026 का रहस्य
जब कलयुग के अंत में इतना समय शेष है, तो फिर 2026 को लेकर इतना डर क्यों है? यहाँ 'संधिकाल' का सिद्धांत काम आता है। उड़ीसा के संत अच्युतानंद दास ने 'भविष्य मालिका' में उल्लेख किया है कि युगों के बीच में एक संधिकाल होता है जहाँ पुरानी व्यवस्था टूटती है और नई व्यवस्था जन्म लेती है। कई विद्वान 2026 को उसी 'वैचारिक संधिकाल' का हिस्सा मान रहे हैं।
कल्कि अवतार: अधर्म के विरुद्ध ईश्वरीय हस्तक्षेप
जब पाप अपनी सीमाएं लांघता है, तब भगवान विष्णु का 'कल्कि अवतार' होता है। पुराणों के अनुसार, कल्कि भगवान का प्राकट्य उत्तर प्रदेश के शंभल ग्राम में होगा। शास्त्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल स्थित शंभल ग्राम में विष्णुयशा नामक ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा। जिस प्रकार दुनिया में अधर्म और अनैतिकता बढ़ रही है, श्रद्धालुओं का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि ईश्वरीय शक्ति का प्रादुर्भाव हो चुका है। 2026 को लेकर चल रही भविष्यवाणियों को कई लोग कल्कि अवतार के वैश्विक उदय से जोड़कर देख रहे हैं।
वर्तमान में दुनिया भर में मची उथल-पुथल, युद्ध और नैतिक पतन को देखकर कई लोग यह मान रहे हैं कि कल्कि भगवान का 'ऊर्जा रूप' में प्रादुर्भाव हो चुका है। 2026 को लेकर चल रही चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि यह वर्ष उन शक्तियों के उदय का होगा जो भविष्य में सतयुग की नींव रखेंगी। हालांकि कलयुग अभी लंबा है, लेकिन कल्कि अवतार का उद्देश्य केवल अंत करना नहीं, बल्कि 'बीज वपन' (सत्य का बीजारोपण) करना भी है।
विज्ञान और 2026 का संयोग
वैज्ञानिक दृष्टि से भी 2026 को लेकर कुछ खगोलीय चिंताएं जताई गई हैं। नासा (NASA) और अन्य एजेंसियां अंतरिक्ष में घूमते एस्टेरॉइड्स पर नजर रखती हैं। हालांकि 2026 में किसी 'निश्चित महाविनाश' की पुष्टि विज्ञान नहीं करता, लेकिन सौर तूफान (Solar Storms) और चुंबकीय ध्रुवों के बदलने (Pole Shift) जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं के कारण तकनीकी ग्रिड और संचार व्यवस्था में बड़े व्यवधान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो नासा (NASA) सहित किसी भी वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसी ने 2026 में पृथ्वी से किसी विशाल उल्कापिंड के टकराने या पूर्ण विनाश की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञ इसे 'ग्रेट रीसेट' के रूप में देख रहे हैं, जहाँ जलवायु परिवर्तन और तकनीक (AI) के कारण जीवन शैली में आमूल-चूल बदलाव आएंगे।
विनाश नहीं, यह 'महापरिवर्तन' का काल है
विद्वानों का मानना है कि 2026 विनाश का नहीं बल्कि 'महापरिवर्तन' का वर्ष होगा:
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आध्यात्मिक पुनरुत्थान: भौतिकता की अंधी दौड़ से थककर मनुष्य पुनः 'ऊपर वाले' की ओर लौटेगा।
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प्रकृति का न्याय: जलवायु परिवर्तन जैसी आपदाएं हमें सुधारने का एक मौका दे रही हैं।
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सत्य की विजय: भ्रामक सूचनाओं के बीच अंततः सत्य की ही जीत होगी।
अंधविश्वास और अफवाहें समाज में केवल अस्थिरता पैदा करती हैं। कलयुग की आयु अभी लंबी है, इसलिए 'दुनिया खत्म होने' का डर निराधार है। लेकिन, 2026 निश्चित रूप से हमें आत्मचिंतन की ओर ले जाएगा। भगवान कल्कि का स्मरण हमें यह सिखाता है कि चाहे बाहर कितना भी अंधकार हो, अपने भीतर के सत्य को जीवित रखना ही सबसे बड़ा धर्म है। ऊपर वाले की सत्ता पर यकीन करे और उसका डर मन में रखे, जिससे आप अनीति के मार्ग पर जाने से स्वयं को बचा सके। अपने कर्म में समय है, अभी से सुधार कर ले, अपने माता पिता का सम्मान करना शुरू करे। ऊपर वाला आपका ज़रूर भला करेंगे।
[ फोटो-साभार ]
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