अष्टमी नवमी| जानें कन्या पूजन का सही मुहूर्त और महत्व ,क्यों इस दिन मिलता है मां दुर्गा का सबसे खास आशीर्वाद

चैत्र नवरात्रि अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और भक्तों के मन में रामनवमी और कन्या पूजन को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है। इस पवित्र समय में हर कोई सही तिथि और मुहूर्त जानना चाहता है ताकि पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जा सके और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त हो।
कब है दुर्गा अष्टमी और रामनवमी 2026
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पूरे नौ दिनों की है इसलिए तिथियों को लेकर कोई भ्रम नहीं है। 26 मार्च को दुर्गा अष्टमी का व्रत रखा जाएगा और इसके अगले दिन 27 मार्च को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा होती है और नवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
ये भी पढ़ें चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन: मां स्कंदमाता की पूजा से मिलता है संतान सुख और ज्ञान का आशीर्वादकन्या पूजन का महत्व क्यों है खास
नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है और उनकी पूजा करना शक्ति की उपासना का सबसे सरल तरीका होता है। मान्यता है कि कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर में सुख समृद्धि आती है।
अष्टमी और नवमी पर ही क्यों किया जाता है पूजन
अष्टमी और नवमी तिथि को शक्ति और सिद्धि प्राप्ति का विशेष दिन माना जाता है। इन दिनों कन्याओं में देवी के नौ रूपों का वास होता है। इसलिए इन दिनों कन्याओं को भोजन कराना और उनका आशीर्वाद लेना बहुत शुभ माना जाता है और इससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त 2026
दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह 6 बजकर 12 मिनट से 7 बजकर 51 मिनट तक और फिर सुबह 10 बजकर 56 मिनट से दोपहर 3 बजकर 32 मिनट तक पूजा का शुभ समय रहेगा। रामनवमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 17 मिनट से दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा और रवि योग पूरे दिन रहेगा।
कन्या पूजन की सरल विधि
कन्या पूजन के लिए सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को पवित्र करें। इसके बाद छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोएं और उन्हें सम्मान से बैठाएं। उनके माथे पर तिलक लगाएं और उन्हें भोजन कराएं। अंत में उन्हें दक्षिणा और उपहार देकर आशीर्वाद लें और मां दुर्गा की आरती करें।
कन्या पूजन के मंत्र से बढ़ेगा फल
पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल और बढ़ जाता है। भक्त श्रद्धा से मां दुर्गा के मंत्रों का उच्चारण करते हैं जिससे सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भक्तों के लिए आस्था और विश्वास का पर्व
चैत्र नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं है बल्कि यह आस्था विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दौरान की गई साधना जीवन में नई उम्मीद और सुख समृद्धि लेकर आती है।
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