ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला टाला, ‘बहुत सकारात्मक’ बातचीत का दिया हवाला

न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को 5 दिन के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से चली बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया है। ईरान ने ट्रंप के इस बयान पर कुछ नहीं कहा है हालांकि तेहरान पहले कह रहा था कि वो संघर्ष विराम के लिए तैयार नहीं है। रविवार को ट्रंप की एक पोस्ट ने हंगामा मचा दिया था। ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी ईरान को दी थी। कहा था कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान के बड़े बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया जाएगा। इसके जवाब में ईरान ने भी दावा किया कि वो अमेरिकी सहायता से चलने वाले किसी भी संयंत्र को नहीं छोड़ेगा।
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ये भी पढ़ें जब 26/11 हमले का जश्न मनाते-मनाते फूट-फूटकर रोए थे धुरंधर के दो बड़े एक्टर्स, माहौल हो गया था गमगीननए संकट की आहट सुनाई दी और दुनिया का शेयर बाजार धड़ाम से गिरा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार तड़के ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका की ईरान के साथ "सकारात्मक और उत्पादक बातचीत हुई है।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, 'चर्चाओं का ये दौर पूरे हफ्ते जारी रहेगा। दोनों देशों के बीच गहन और विस्तृत चर्चाओं के सकारात्मक रवैए को देखते हुए, "मैंने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैन्य हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए।" हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि वाशिंगटन किसके साथ क्या बात कर रहा है।
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद ट्रंप ने कहा था कि वो नहीं जानते कि किसके हाथ में ईरान की कमान है? अयातुल्ला के बेटे जिन्हें देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है वो अभी तक किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होते नहीं देखे गए हैं। शुरुआत में ट्रंप ने इसे एक तेज और निर्णायक कार्रवाई बताते हुए ईरान के नेतृत्व, मिसाइल क्षमता और परमाणु ढांचे को खत्म करने की बात कही थी, लेकिन अब यह संघर्ष लंबा खिंचता दिख रहा है। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर हमले हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के अधिकतर हिस्से में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने लगा है। अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों का दबाव भी है। वर्तमान स्थितियों को ध्यान में रख ट्रंप अब इस टकराव से निकलने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि वह “मध्य पूर्व में हमारे बड़े सैन्य प्रयासों को धीरे-धीरे खत्म करने” की तैयारी कर रहे हैं।
खास बात यह है कि इस बार उन्होंने ईरान में सत्ता परिवर्तन (रेजीम चेंज) की शर्त का उल्लेख नहीं किया, जो पहले उनके रुख का अहम हिस्सा था। हालांकि इजरायल ने अभी तक यह संकेत नहीं दिया है कि वह ट्रंप के किसी भी शांति प्रयास का समर्थन करेगा। इजरायल के सैन्य प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि युद्ध अभी मध्य चरण में है, लेकिन दिशा स्पष्ट है और वे अपने भविष्य और स्वतंत्रता के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। इस बीच एक गंभीर घटनाक्रम में ईरान की मिसाइलों ने इजरायल की प्रसिद्ध आयरन डोम सुरक्षा प्रणाली को भेदते हुए डिमोना जैसे संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाया, जहां परमाणु संंयंत्र मौजूद हैं। ट्रंप ने सोमवार को यह भी कहा कि ईरान के बिजली तंत्र पर प्रस्तावित हमले को फिलहाल टाल दिया गया है, क्योंकि बातचीत का माहौल “गंभीर, विस्तृत और रचनात्मक” है और यह प्रक्रिया जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह इस संघर्ष के कुछ भू-राजनीतिक पहलुओं, खासकर खाड़ी देशों पर ईरान की प्रतिक्रिया, का पूरी तरह अनुमान नहीं लगा पाए थे। करीब 40 किलोमीटर चौड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है और यहां के तनाव ने तेल की कीमतों में तेज उछाल ला दिया है, जिसका असर दूर अमेरिका तक पेट्रोल की कीमतों पर देखा जा रहा है।
इसी दबाव में ट्रंप प्रशासन ने युद्ध के दौरान ही ईरानी तेल खरीद पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देने जैसा असाधारण कदम भी उठाया, ताकि कीमतों को काबू में रखा जा सके। ट्रंप ने अन्य देशों पर भी दबाव डाला है कि जो इस जलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं, वे इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लें। उन्होंने कहा कि अंततः होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी और सुरक्षा उन देशों को करनी होगी जो इसका उपयोग करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भारत और चीन जैसे कुछ देशों के लिए जहाजों को गुजरने की अनुमति दी, जबकि अन्य के लिए पाबंदी की चेतावनी दी। इस बीच नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि उनका संगठन और दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और जापान जैसे देश इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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