बरेली के डीएम व एसएसपी ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर बताया, घर में नमाज़ अदा करने से रोका नहीं गया
--कहा, कानून व्यवस्था के मद्देनजर निरोधात्मक कार्यवाही की गई थी

प्रयागराज/बरेली। बरेली में घर के भीतर नमाज अदा करने से रोका नहीं गया था, कानून व्यवस्था के मद्देनजर निरोधात्मक कार्यवाही की गई थी। उसके बाद भी नमाज अदा करने से रोका नहीं गया और वहां रोज लगभग 50 लोग नमाज अदा कर रहे हैं।
यह बात घर के भीतर नमाज अदा करने से रोकने के मामले में कोर्ट के आदेश पर उपस्थित वहां के डीएम व एसएसपी की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने न्यायालय को बताई।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अपर महाधिवक्ता के अनुरोध पर मामले में सुनवाई के लिए 25 मार्च की तारीख लगाई है और डीएम व एसएसपी को उस दिन भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
सोमवार को देर शाम लगभग एक घंटे तक हुई सुनवाई में एडिशनल एडवोकेट जनरल ने दोनों अधिकारियों की ओर से उनका हलफनामा प्रस्तुत किया। साथ ही बताया कि 16 जनवरी को जिस घर में नमाज अदा की जा रही थी, वह याची का घर नहीं है। वह हसीन खान का घर है। वहां दूसरे गांव में मौलवी बुलाकर नमाज अदा की जा रही थी। याची तारिक खान को पूर्व में एक स्थान पर मस्जिद व मदरसा बनाने से रोका गया था।
उन्होंने कहा कि याची का यह कहना गलत है कि 16 जनवरी को नमाज अदा करने से रोका गया था। वहां सांप्रदायिक तनाव की स्थिति न बने, इसलिए निरोधात्मक कार्यवाही की गई, जो नमाज अदा होने के बाद कानून व्यवस्था के मद्देनजर की गई थी।
सरकार की तरफ़ से यह भी कहा कि उसके बाद रमजान के महीने में भी कभी वहां नमाज अदा करने से नहीं रोका गया और न ही वर्तमान में रोका जा रहा है। उनका कहना था कि कोर्ट के आदेश के बाद वहां लगभग 50 लोग बराबर नमाज अदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि याचिका में की गई दो प्रार्थना पूरी हुई हैं नतीजतन याचिका औचित्यहीन हो गई है। बाद में अपर महाधिवक्ता के अनुरोध पर कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 25 मार्च की तारीख लगा दी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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