गुण-दृष्टि अपनाएं, निंदक से दूर रहें

मानवीय कमजोरी यह है कि हम अक्सर दूसरों के दोष खोजने और उनकी निंदा सुनने में ही आनंद पाते हैं। हम दूसरों के अवगुण देखने में प्रवृत्त रहते हैं, जबकि प्रत्येक व्यक्ति में गुण भी अवगुण भी होते हैं। यदि अवगुण न हों तो या तो वह व्यक्ति मर चुका है या वह अभी उत्पन्न भी नहीं हुआ है।
जीवन को आनंदमय बनाना है तो दूसरों में गुण देखें और अपने भीतर के अवगुण सुधारें। निंदक दुनिया को हजार आंखों से देखेगा, जबकि हम केवल दो आंखों से ही संसार देख सकते हैं। यदि आप किसी की निंदा करते हैं, तो यही व्यवहार आपके साथ भी होगा।
दुनिया में कोई पूर्ण नहीं है, क्योंकि पूर्ण केवल प्रभु हैं। अतः चारों ओर गुणों की खोज करें और उन्हें अपनाएं। यदि कोई आपकी निंदा करता है तो स्वयं को निंदित न समझें। अपनी त्रुटियों को पहचानें और सुधारें। दूसरों की आलोचना पर ध्यान न दें, अपने आप के न्यायाधीश स्वयं बनें।
गुण-दृष्टि अपनाने से जीवन में सच्चा आनंद और संतोष मिलेगा।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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