गुण-दृष्टि अपनाएं, निंदक से दूर रहें
मानवीय कमजोरी यह है कि हम अक्सर दूसरों के दोष खोजने और उनकी निंदा सुनने में ही आनंद पाते हैं। हम दूसरों के अवगुण देखने में प्रवृत्त रहते हैं, जबकि प्रत्येक व्यक्ति में गुण भी अवगुण भी होते हैं। यदि अवगुण न हों तो या तो वह व्यक्ति मर चुका है या वह अभी उत्पन्न भी नहीं हुआ है।
दुनिया में कोई पूर्ण नहीं है, क्योंकि पूर्ण केवल प्रभु हैं। अतः चारों ओर गुणों की खोज करें और उन्हें अपनाएं। यदि कोई आपकी निंदा करता है तो स्वयं को निंदित न समझें। अपनी त्रुटियों को पहचानें और सुधारें। दूसरों की आलोचना पर ध्यान न दें, अपने आप के न्यायाधीश स्वयं बनें।
गुण-दृष्टि अपनाने से जीवन में सच्चा आनंद और संतोष मिलेगा।
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