भारतीय समाज में नारी का सम्माननीय स्थान, हर क्षेत्र में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
भारतीय समाज में नारी का स्थान सदा से ही अत्यंत सम्माननीय रहा है। नारी को त्याग, दया, करुणा, ममता और धैर्य की प्रतिमूर्ति माना जाता है। समय के साथ महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और क्षमता के बल पर स्वयं को सिद्ध करते हुए समाज के हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
वर्तमान समय में महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति, प्रशासन और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं, बल्कि कई मामलों में उनसे आगे निकल रही हैं।
हालांकि इसके बावजूद समाज में महिलाओं के प्रति सोच और धारणाओं में बदलाव की आवश्यकता अभी भी महसूस की जाती है। दुख की बात यह है कि आधुनिक युग में भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी घृणित और अमानवीय घटनाएं सामने आती हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
महिलाएं सुबह से लेकर देर रात तक घर और कार्यस्थल दोनों जगह अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करती हैं। वे हर मोर्चे पर अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहती हैं। आज लगभग हर क्षेत्र और प्रत्येक संस्थान में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी है और यह भी सत्य है कि वे कई बार पुरुषों से भी अधिक लगन और गुणवत्ता के साथ कार्य संपन्न करती हैं।
नारी के बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं माना जाता। मां के रूप में वह सदैव पूजनीय रही है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है—
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:”
अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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