कर्तव्य, श्रम और ईमानदारी से खिलते हैं शांति और सम्मान के फूल
मानवीय जीवन में सुख और शांति की खोज भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि आंतरिक गुणों के सिंचन से संभव है। जिस प्रकार एक माली अपनी बगिया को सुंदर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करता है, उसी प्रकार यदि मनुष्य अपने कर्तव्य की लता में श्रम का पानी और ईमानदारी की खाद डालना शुरू कर दे, तो उसके जीवन रूपी आंगन में शांति के सुगंधित फूल स्वयं खिलने लगेंगे। सफलता और शांति का मार्ग बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर की गहराई में छिपा है।
अध्यात्म और नैतिकता का सिद्धांत कहता है कि जो व्यक्ति जीवन रूपी सागर में गहरी डुबकी लगाने का साहस करता है, वही उसके धरातल को छू पाता है और अमूल्य रत्नों को प्राप्त करता है। यह गहराई एकाग्रता और समर्पण से आती है। इसके साथ ही, दूसरों के प्रति हमारे विचार हमारे स्वयं के भाग्य का निर्माण करते हैं। जब मनुष्य दूसरों की बुराई करना और उनके अहित की सोच को त्याग देता है, तो उसका अपना कल्याण स्वतः ही आरंभ हो जाता है। इसके विपरीत, दूसरों के अहित में सहयोगी की भूमिका निभाना स्वयं के जीवन को दुखों के दलदल में धकेलने जैसा है।
हृदय में प्रेम का संचार तभी संभव है जब घृणा का त्याग किया जाए। घृणा को छोड़ते ही प्रेम की सुगंध व्यक्ति के व्यक्तित्व से फूटने लगती है। इसके उलट, जिनका जीवन अहंकार और अनंत कामनाओं से ग्रसित होता है, वे अपने चारों ओर अशांति की तरंगें ही फैलाते हैं। समाज में सम्मान पाने का सरल सूत्र यह है कि सम्मान देने की पहल स्वयं से की जाए। हालांकि, इसमें विवेक का होना भी अनिवार्य है। सुपात्र का सम्मान करना जहाँ समाज को बल देता है, वहीं कुपात्र पर कृपा लुटाना बर्बादी का मार्ग प्रशस्त करता है। अतः व्यक्ति को अपने आचरण, विचार और पात्रता की पहचान के प्रति सदैव जागरूक रहना चाहिए।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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