काला चना: भारी नहीं, बल्कि संतुलित आहार काला चना, मांसपेशियों के लिए संजीवनी
नई दिल्ली। कई बार खाना खाने के बाद भी शरीर में कमजोरी महसूस होती है, बहुत जल्दी थकान हो जाती है और शरीर भी दर्द करने लगता है। ये संकेत हैं कि शरीर अंदर से मजबूत नहीं है और हार्मोन असंतुलित हैं। भारतीय थाली में सजे खाने में फाइबर होता है लेकिन प्रोटीन की कमी होती है। शरीर को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है। ऐसे में दालों के अलावा, रसोई में मिलने वाले काले चने में भरपूर प्रोटीन होता है। इसका नियमित सेवन शरीर को अनगिनत लाभ देता है। काला चना तुरंत ऊर्जा नहीं देता, बल्कि स्थिर शक्ति देता है।
आयुर्वेद में काला चना मांसधातु वर्धक, बल्य और अग्नि-स्थिर माना गया है। यह शरीर में केवल वजन नहीं, घनत्व, ताकत और सहनशक्ति बनाता है। काले चने को लेकर लोगों के बीच धारणा है कि चना पाचन में भारी होता है, लेकिन ये आधी और गलत जानकारी है। काले चने का सेवन अगर सही तरीके से किया जाए तो यह अग्नि को तेज करने, आंतों को मजबूत करने, और गट हेल्थ को सुधारने में मदद करता है। ये भारी नहीं, बल्कि संतुलित आहार है। अब ये भी जान लीजिए कि चने का सेवन कैसे किया जा सकता है। इसके लिए 1 कटोरी काले चने को रात के समय पानी में भिगो दें और सुबह चनों को उबाल लें और हल्के तेल में हींग और जीरे के साथ तड़का लगा दें। चने को कच्चा खाने से बचें क्योंकि इससे पेट से संबंधी परेशानी जैसे गैस और कब्ज हो सकती है।
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रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
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