इश्क, गद्दारी और अमेरिकी इनपुट : पाताल से ढूंढ निकाल कर मारा दुनिया का सबसे खूंखार ड्रग लॉर्ड 'एल मेनचो' को
मेक्सिको सिटी। मेक्सिको के जंगलों में छिपे दुनिया के सबसे वांछित ड्रग माफिया और 'जालिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल' के सरगना नेमेसियो ओसेगुएरा सर्वेंट्स, उर्फ 'एल मेनचो' की कहानी खत्म होने के तीन किरदार रहे हैं। ये हैं प्रेम, विश्वासघात और अमेरिकी सुराग। मेक्सिकन विशेष बलों ने एक बेहद गोपनीय और साहसिक अभियान में सालों से नाक में दम करने वाले इस दुर्दांत अपराधी एल मेनचो को अपनी गोलियों का निशाना बना ही डाला। इस घटना के अंजाम ने पूरे मेक्सिको को भले ही हिंसा की धधकती आग में झोंक दिया हो, लेकिन सुरक्षा बलों के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।
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दरअसल एल मेनचो को पकड़ना किसी नामुमकिन मिशन जैसा था, लेकिन इसकी पटकथा 'रोमांस और धोखे' की कलम से लिखी गयी। मेक्सिकन रक्षा सचिव रिकार्डो ट्रेविला ट्रेजो के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने एल मेनचो की प्रेमिका के 'बेहद खास और भरोसेमंद आदमी' को तोड़ लिया था। यही प्रेम आखिर में एल मेनचो के लिए काल की कहानी लेकर आया। इसी सूत्र ने सुरक्षा बलों को तपालपा के बाहरी इलाके में स्थित एक गुप्त केबिन का पता बताया। एल मेनचो इसी केबिन में छिपा रहता था। जब एक रोज उसकी प्रेमिका वहां से निकली, तब अमेरिकी खुफिया एजेंसी के जासूसों ने मेक्सिकन वायुसेना और नेशनल गार्ड को इशारा भेजा। सुरक्षा बलों ने बिना देर किए फौरन ही वहां पर ताबड़तोड़ धावा बोल दिया।
तपालपा के पहाड़ी और जंगली इलाके 'कबानास ला लोमा' में रविवार सुबह मौत का तांडव शुरू हुआ। भारी हथियारों से लैस कार्टेल के गुर्गों ने सेना पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। चश्मदीदों के वीडियो में गोलियों की गड़गड़ाहट और आसमान में उठता गहरा काला धुआं साफ देखा जा सकता था। सैकड़ों गोलियां दाग दी गयीं। इस भयावह गोलाबारी में गैंग के आठ सदस्य मारे गए। मौत का साया मंडराता देख मेनचो अपने अंगरक्षकों के साथ घने जंगल की झाड़ियों में छिप गया, लेकिन विशेष बलों की एक टीम ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। जंगल के भीतर हुई अंतिम मुठभेड़ में एल मेनचो और उसके दो बॉडीगार्ड बुरी तरह घायल हो गए। जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रहे इन तीनों को पकड़ लिया गया। उनको अस्पताल ले जाने की कोशिश की गयी। आनन-फानन में एक सैन्य हेलीकॉप्टर ने उन्हें लेकर ग्वाडलजारा के लिए उड़ान भरी, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचने से पहले ही हवा में ही एल मेनचो ने दम तोड़ दिया।
सुरक्षा बलों को पता था कि उसकी मौत से शहर में जलजला आ जायेगा। इसलिए जवाबी हिंसा के डर से हेलीकॉप्टर का रास्ता बदलकर उसे मोरेलिया हवाई अड्डे पर उतारा गया, जहां से फाइटर जेट के जरिए उसके शव को मेक्सिको सिटी लाया गया।
अपने आका की मौत की खबर सुनते ही जालिस्को कार्टेल के गुर्गों ने पूरे देश में तबाही मचा दी। सड़कों पर वाहनों को आग लगा दी गयी, सैन्य चौकियों पर हमले हुए और प्रमुख शहरों में जगह-जगह आग लगा दी। इस जवाबी हिंसा में नेशनल गार्ड के 25 जवान शहीद हो गए। गिरती लाशों और हर तरह हो रहे धमाकों के कारण कई देशों ने अपने नागरिकों को घरों में रहने की सलाह दी है और कई एयरलाइनों ने उड़ानें रद्द कर दी। राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम के लिए यह अभियान एक बड़ा सियासी इम्तिहान था। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ड्रग तस्करी रोकने के लिए भारी दबाव, तो दूसरी तरफ कुछ ही महीनों बाद होने वाला 'फीफा वर्ल्ड कप 2026'। आगजनी, धमाकों और गुबार देख रहे ग्वाडलजारा शहर में वर्ल्ड कप के मैच होने हैं।
मेक्सिको सरकार ने एल मेनचो को खत्म कर दुनिया को संदेश दिया है कि मेक्सिको अब ड्रग माफियाओं के आगे नहीं झुकेगा, चाहे इसकी कीमत कितनी भी बड़ी क्यों न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि 1.5 करोड़ डॉलर के इनामी एल मेनचो की मौत उसके गैंग के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन खतरा टला नहीं है। जालिस्को कार्टेल एक 'फ्रेंचाइजी' मॉडल पर काम करता है, जिसके कई कमांडर अभी भी खुली हवा में सांसे भर रहे हैं। राष्ट्रपति शीनबाम ने जनता से शांति की अपील करते हुए कहा है, "हमारी प्राथमिकता सामान्य स्थिति बहाल करना है।" फिलहाल, मेक्सिको की सड़कें धधक रही हैं और दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एल मेनचो का साम्राज्य अब ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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