अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुवैत में मारे गए छह सैनिकों को दी श्रद्धांजलि
वाशिंगटन। ईरान के साथ संघर्ष के दौरान 1 मार्च को एक ड्रोन हमले में अमेरिकी सेना के छह सैनिक मारे गए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डोवर एयर फोर्स बेस पर अमेरिकी झंडे में लिपटे इन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने जान गंवाने वाले इन सैनिकों को सैल्यूट किया। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के तनाव के बीच कुवैत में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप स्थानीय समयानुसार शनिवार को श्रद्धांजलि देने के लिए डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस पर एक ट्रांसफर सेरेमनी में शामिल हुए। राष्ट्रपति ट्रंप दोपहर 3:09 बजे (स्थानीय समयानुसार) पर फ्लाइट लाइन पर आए।
ये भी पढ़ें ग्लोबल जीडीपी में भारत का दबदबा: चीन ने माना- दुनिया के विकास में 50% हिस्सेदारी देंगे दोनों देशयह प्रक्रिया दोपहर 3:41 बजे “फ्लाइट लाइन डिसमिस्ड” के नारे के साथ खत्म हुई। ट्रंप ने नेवी रंग का सूट और लाल टाई पहनी थी, इसके साथ ही एक सफेद बॉल कैप भी थी जिस पर सुनहरे अक्षरों में “यूएसए” लिखा था। जब मिलिट्री ऑनर गार्ड हर ट्रांसफर केस को एयरक्राफ्ट से ले जा रहा था, तो उन्होंने सैल्यूट किया। अधिकारियों की अगली लाइन में ट्रंप, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उषा वेंस शामिल थे। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन पास में खड़े थे। दूसरी लाइन में व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स, खास दूत स्टीव विटकॉफ और अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी थे। नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल भी मौजूद थे। इसके अलावा, अमेरिकी आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज भी मौजूद थे। कांग्रेस के सदस्य और राज्य के अधिकारी मारे गए सैनिकों के परिवारों से मिलने गए। मौजूद लोगों में सीनेटर लिसा ब्लंट रोचेस्टर, जोनी अर्न्स्ट, डेब फिशर और पीट रिकेट्स के साथ-साथ फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस, नेब्रास्का के जिम पिलेन और आयोवा के किम रेनॉल्ड्स भी शामिल थे।
मारे गए छह सैनिकों के परिवार वाले एयरलाइन के पास खड़े थे, जब एक-एक करके ट्रांसफर केस किए जा रहे थे। इन सैनिकों की पहचान मेजर जेफरी आर. ओ'ब्रायन, इंडियनोला, आयोवा; कैप्टन कोडी ए. खोर्क, विंटर हेवन, फ्लोरिडा; चीफ वारंट ऑफिसर 3 रॉबर्ट एम. मार्जन, सैक्रामेंटो, कैलिफोर्निया; सार्जेंट फर्स्ट क्लास निकोल एम. अमोर, व्हाइट बेयर लेक, मिनेसोटा; सार्जेंट फर्स्ट क्लास नोआ एल. टिटजेंस, बेलेव्यू, नेब्रास्का; और सार्जेंट डेक्लान जे. कोडी, वेस्ट डेस मोइनेस, आयोवा के रूप में हुई। ज्यादातर सैनिक डेस मोइनेस, आयोवा में मौजूद 103 सस्टेनमेंट कमांड में तैनात थे। अधिकारियों ने कहा कि छह सैनिक कुवैत के पोर्ट शुआइबा में एक तनाव वाली घटना में मारे गए थे। डोवर एयर फोर्स बेस के अधिकारियों के अनुसार, शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर को बेस तक लाने के लिए 'ट्रांसफर केस' का उपयोग किया जाता है। उल्लेखनीय है कि ये 'ट्रांसफर केस' ताबूत नहीं होते हैं। जब किसी सैनिक की औपचारिक पहचान पूर्ण हो जाती है और उसे परिजनों को सौंपने के लिए तैयार कर लिया जाता है, तब उसके अवशेषों को एक ताबूत में रखकर उनकी अंतिम विदा के लिए भेजा जाता है।
डोवर में इस पूरी प्रक्रिया को 'समारोह' के बजाय एक 'गंभीर और गरिमामय प्रक्रिया' के रूप में परिभाषित किया गया है। डोवर एयर फोर्स बेस विदेशों में शहीद हुए अमेरिकी सैन्य कर्मियों की घर वापसी का मुख्य केंद्र है। वियतनाम युद्ध के बाद से इसकी 'मॉर्टुअरी अफेयर्स फैसिलिटी' ने हजारों अमेरिकी सेवा सदस्यों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ वापस लाने का उत्तरदायित्व निभाया है। पार्थिव शरीर का यह स्थानांतरण एक प्राचीन सैन्य परंपरा है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और शोक संतप्त परिवार 'फ्लाइट लाइन' पर एकत्रित होकर उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने विदेशी धरती पर संघर्ष या युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी है।
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